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रटी बात ही क्यों बोलता है तोता?

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बहुत दिनों की बात है। घोर तपस्या के कारण बुलबुल को मनुष्य की बोली बोलने का वरदान मिला। बुलबुल ने रास्ते में जाते आदमी से पूछा – ‘‘ कहो, कैसे हो?‘‘
आदमी सोचने लगा, सचमुच यह पक्षी आदमी की बोली बोल रहा है । यह परखने के लिए कि उसमें ज्ञान है कि नहीं, वह आदमी बुलबुल को घर ले आया। उसने एक तोता भी पाला हुआ था। घर पहुंचकर उसने बुलबुल से कहा कि वह तोते को भी आदमी की बोली बोलना सिखा दे।
वह आदमी चोरी किया करता था। एक दिन वह पड़ोस के एक आदमी के घर से गेहूं चुरा लाया। उसकी ये सारी हरकतें बुलबुल देख रहा था। अचानक थोड़ी देर बाद गांव वाले उसके घर में घुस आये।
‘‘तुम्हारे पड़ोसी का गेहूूं चोरी हो गया है। तुम्हें तो नहीं मालूम?‘‘ – उन्होेंने पूछा।
‘‘नहीं, मुझे कुछ भी मालूम नहीं है।‘‘ – उस आदमी ने तपाक से उत्तर दिया।
वे लोग वापस जाने लगे, तब ही पिंजड़े से आवाज आयी – ‘‘ यह झूठ बोल रहा है। मैंने अपनी आंखों से देखा है। इसने गेहूं का बोरा चुराकर पीछे के कमरे में छिपाकर रख दिया है।‘‘
उन व्यक्तियों ने खोज की, तो गेहूं का बोरा मिल गया। उन्होंने उस आदमी से कहा – ‘‘ तुम कल कचहरी में हाजिर हो और बतौर गवाह के उस पक्षी को भी अपने साथ लाओ।‘‘
उस रात को उस आदमी ने बुलबुल के पिंजड़े को एक मेज पर रखकर ऊपर से एक कम्बल डाल दिया और कहा – ‘‘ आराम से सो जाओ।‘‘
इसके पश्चात उसने जोर – जोर से ढोलक बजाना शुरू कर दिया और इधर-उधर पानी की बाल्टियां डालने लगा। पानी के छींटे बुलबुल के पिंजरे पर भी गिर जाते थे।
सबुह हुई। दोनों कचहरी गये। मुखिया ने बुलबुल से प्रश्न किया – ‘‘ बताओ, तुमने अपनी आंखों से क्या-क्या देखा?‘‘
बुलबुल ने बगैर जोड़े-घटाये सारी बातें बयान कर दीं। मुखिया ने उस व्यक्ति को दोषी करार दिया। लेकिन फैसला सुनाने से पूर्व ही वह आदमी चिल्लाया – ‘‘ठहरो, यह झूठ बोल रहा है। मेहरबानी करके आप इससे पूछें कि उस रात मौसम कैसा था? सच्चाई अपने आप सामने आ जाएगी।‘‘
मुखिया ने बुलबुल से पूछा तो उसने उत्तर दिया – ‘‘ उस रात खूब बादल गरज रहे थे और पानी बरस रहा था। ‘‘
सब लोग जानते थे कि उस रात मौसम बिल्कुल साफ था। अन्त में बुलबुल को झूठा मानकर उस आदमी को छोड़ दिया गया।
बुलबुल उस आदमी के साथ घर वापस आया। वह तोते से कहने लगा – ‘‘मित्र, मैं तो जा रहा हूँ ,लेकिन कभी अपने मन की बात मत कहना। आदमी को यह पसन्द नहीं है। इसलिए वही कहना, जो वह चाहता है। ‘‘
आज भी तोता आदमी से अपने की मन की बात नहीं कहता है। वह वही कहता है, जो आदमी चाहता है।