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Coconut – a sacred fruit | नारियल – एक पवित्र फल

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Coconut

भारत के सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन में नारियल का महत्व जग-जाहिर है। किसी भी शुभ काम के प्रारंभ में सगाई-विवाह एवं अन्य मांगलिक अवसरों पर नारियल एक अत्यंत आवश्यक एवं पवित्र वस्तु माना जाता है। इसीलिए नारियल को “श्रीफल” के नाम से भी जाना जाता है। वैसे इसे हिंदी में नारियल, खोपरा, गोला, मराठी में नारल, गुजराती में नालियर का, बंगला में नारिकेल, संस्कृत में भी नारिकेल, तथा अंग्रेजी में कोकोनट नाम से पुकारा जाता है। लेकिन नारियल का वनस्पति-शास्त्रीय नाम ‘कोकस न्यूसीफेरा” है।

वनस्पति जगत में नारियल को खजूर की जाति का पेड़ माना जाता है। नारियल-उत्पादन में भारत का दूसरा स्थान है। नारियल का फल दस से पन्द्रह इंच लम्बा और 6 से 8 इंच व्यास का होता है। फल के ऊपर ‘शों की गद्दी और उसके नीचे कोठ की मजबूत खोपड़ी बनी होती है। खोपड़ी के नीचे खाने योग्य सफेद गिरी रहती है तथा गिरी में पानी भरा रहता है। नारियल के पानी में मां के दूध के समान समस्त गुण उपलब्ध होने के कारण यह बच्चों के लिए अत्यधिक लाभदायक है। इसके सेवन से पेट-दर्द, अनिद्रा, कब्ज, कमजोरी आदि रोगों में लाभ होता है। शरीर की रोग-प्रतिरोधात्मक शक्ति में भी यह वृद्धि करता है।

रासायनिक संरचना : (प्रति सौ ग्राम नारियल)

पानी 37.3 ग्राम, कार्बोहाइड्रेट 8.0 ग्राम, चिकनाई 47.6 ग्राम, प्रोटीन : 04.5 ग्राम, खनिज लवण : 07.0 ग्राम, कैल्शियम : 00. ग्राम, आयरन : 0.7 ग्राम, रेशा : 05.6 ग्राम तथा फास्फोरस : 00.2 ग्राम l इसके अलावा नारियल में विटामिन ए, बी, और सी भी होता है। 00 ग्राम नारियल में 444 कैलीरी ऊर्जा पाई जाती है।

आयुर्वेद के अनुसार, नारियल की गिरी शीतल, देर से पचने वाली, पुष्टिकारक, बलदायक, रस रक्तादिवर्द्धक, मूत्राशय-शोधक, वात, पित्त व रक्त -विकार को दूर करने वाली होती है। न केवल नारियल बल्कि इसका जल, फूल, जड़, तेल व छाल भी औषधियों के रूप में प्रयुक्त होते हैं।

विभिन्‍न रोगों के उपचार में नारियल का उपयोग :

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बवासीर व कब्ज :

  • खूनी बवासीर के रोगी नारियल की जटा को जलाकर उसकी राख में महीन पीसी हुई शक्कर मिलाकर दस ग्राम मात्रा पानी के साथ सेवन करें।
  • कब्ज की शिकायत होने पर नारियल की गिरी का उपयोग करना चाहिए। इसके रेशे आंतों को चिकनी कर देते हैं।
  • पानी वाले नारियल को पानी सहित सेवन करने से कब्ज दूर होता है।

केश रोग

  • बाल झड़ने की समस्या होने पर नियमित रूप से शुद्ध नारियल तेल में कपूर मिलाकर हल्का गर्म करके सिर में मालिश करें।
  • एक भाग नींबू का रस और दो भाग नारियल का तेल मिलाकर सिर में धीरे-धीरे मालिश करने से बालों की जड़े मजबूत होती हैं।
  • बाल सफेद होने पर नारियल के तेल में ताजा आंवले के टुकड़े डालकर तेल को खूब गर्म करें l बाद में छानकर शीशी में भर लें। इस तेल को नियमित रूप से कम से कम एक माह तक बालों में लगाएं।

खांसी

  • नारियल की जटा  को जलाकर उसकी राख को शहद में मिलाकर दिन में दो बार लेने से दमा व खांसी में राहत मिलती है।
  • बच्चों को होने वाली कूकर खांसी में नारियल का शुद्ध तेल दिन में चार बार पांच-पांच बूंद पिलाएं।
  • सिगरेट पीने से होने वाली खांसी तथा सूखी खांसी के उपचार हेतु नारियल के ताजा दूध में एक-एक चम्मच शहद और खसखस मिलाकर रात्रि में शयन से पूर्व दें,  अवश्य राहत मिलेगी।

अन्य :

  • प्रसव से कुछ महीने पहले यदि गर्भवती स्त्री नारियल की गिरी, मिश्री व मक्खन का नियमित रूप से सेवन करें तो संतान गौरवर्ण, सुन्दर तथा स्वस्थ उत्पन्न होगी।
  • अनिद्रा, घबराहट, हिचकी, ज्वर, अधिक प्यास लगना आदि कई रोगों में नारियल का ताजा पानी पीना अत्यन्त लाभप्रद है।
  • नारियल खाने से चूहे काटने का जहर उतर जाता है।
  • आग से जलने पर प्रभावित भाग पर नारियल का तेल व चूने का पानी मिलाकर लगाने से राहत मिलती है।
  • पेशाब में जलन होने पर हरा धनिया और गुड़ नारियल के पानी में मिलाकर पीना चाहिए।
  • नारियल के पानी में गन्ने का रस, जौ का पानी और कुलथी का पानी मिलाकर पीने से मूत्रावरोध दूर होता है।
  • एक सप्ताह तक सुबह बिना कुछ खाए, नारियल का सेवन करने से नकसीर हमेशा के लिए ठीक हो जाती है।
  • जीभ अथवा मुंह में छाले हो जाने पर नारियल की गिरी व मिश्री चबाते रहने से राहत मिलती है।
  • नारियल के तेल में नींबू का रस मिलाकर मालिश करने से त्वचा रोग तथा खुजली में फायदा होता है।
  • मासिक धर्म अनियमित तथा कम आने पर नारियल का सेवन करना चाहिए।
  • नारियल की गिरी के नियमित सेवन से वीर्य में शुकाणुओं की वृद्धि होती है तथा वीर्य गाढ़ा होता है। नारियल कामोद्दीपक फल है, इसके सेवन से पुरूषार्थ शक्ति बढ़ती है।
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परहेज / सावधानियां :

  • नारियल की गिरी सड़ी गली या खटूटी हो तो सेवन नहीं करें।
  • नारियल की गिरी को ताजा सेवन करना ही श्रेयस्कर है। पुरानी व बासी नारियल की गिरी स्वास्थ्य की दृष्टि से नुकसानदेह हो सकती है।
  • एक बार में चालीस-पचास ग्राम से अधिक नारियल-गिरी का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • खांसी व दमा के रोगियों को नारियल की गिरी का सेवन यथासंभव नहीं करना चाहिए।