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क्रिसमस वृक्ष | Christmas tree information in Hindi

क्रिसमस ईसाई धर्मावलंबियों का सर्वाधिक महत्वपूर्ण त्योहार है। सारे भारत में ही नहीं समूचे विश्व में ईसा मसीह के जन्म दिवस के रूप में क्रिसमस का पर्व बड़े हर्ष और और उल्लास के साथ मनाया जाता है। दिसंबर की शुरुआत के साथ ही इस पर्व की तैयारियां शुरू हो जाती है।आइये हम आपको क्रिसमस वृक्ष के बारें में जानकारी देते है !

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Christmas tree

क्रिसमस ट्री -क्रिसमस का महत्व पूर्ण हिस्सा

क्रिसमस ट्री इस पारंपरिक पर्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। क्रिसमस रक्षकलगभग हर क्रिश्चन परिवार में सजाया जाता है सदाबहार बाल श्रम और 10 फरवरी को सुंदर गुब्बारों रंग बिरंगी रोशनी ऑल झिलमिलाती मोमबत्तियां तथा रुपहले रंगीन लड्डुओं से सजाया जाता है। क्रिसमस ट्री के लिए शंकु के वृक्ष काम में लाए जाते हैं

क्रिसमस वृक्ष पर नहीं लटकाये जाते तोहफे

यह एक सुंदर त्रिगुणात्मक शक्ल का वृक्ष होता है ।इसकी टहनियो पर लाल सुर्ख बड़े आकार के पत्तों के साथ पटसनिया फूल लगे होते हैं । क्रिसमस वृक्ष की साज-सज्जा में एक खास बात खासतौर पर याद रखी जाती है । इस पर काम आने वाली वस्तुएं अथवा तोहफे कभी भी लटकाए नहीं जाते बल्कि उन्हें पेड़ के नीचे रखा जाता है।

जर्मनी में क्रिसमस – वृक्षों की कतारें

जर्मनी में चीड़ के वृक्षों को क्रिसमस वृक्ष के रूप में सजाया जाता है । वहां पर आपको इन वृक्षों की कतारें लगी हुई मिलेंगी। इसकी तैयारी महीनों पहले ही पूरे जोश-ओ-खरोश के साथ शुरू जाती है । जर्मनी में यह मान्यता है कि पहले पादरी, धर्मगुरु आदि झरनों के किनारे वृक्षों के नीचे बैठ कर प्रार्थना- अर्चनाएं किया करते थे । देवदूत उन्हें तोहफे देने की भावना से पेड़ों पर उपहार लटका दिया करते थे

क्रिसमस वृक्ष का पुराना इतिहास

पिछले लगभग दो शताब्दियों से क्रिसमस वृक्ष सजाने की परंपरा चली आ रही है । ईसाई धर्म के प्रादुर्भाव के पहले ही भारत में वृक्ष पूजा की प्राचीन परंपरा रही है । इसके चीनी मिश्र आदि प्राचीन सभ्यताओं में भी शाश्वत जीवन के प्रतीक के रूप में वृक्षों को फूलों के हार पहनाने और उनकी पूजा- अर्चना करने के प्रमाण मिलते हैं । इस प्रकार एक प्रतीक के रूप में वृक्ष- वंदना की अवधारणा बहुत प्राचीन व पुरातन है । क्रिसमस वृक्ष को सजाने की परंपरा उसी अवधारणा की पुष्टि करती प्रतीत होती है।

क्रिसमस वृक्ष के संबंध में सर्वप्रथम प्रामाणिक विवरण सन 1605 ईस्वी में मिलता है। इस परंपरा की शुरुआत का श्रेय पश्चिम जर्मनी के मार्टिन लूथर को जाता है । आदम और हव्वा के प्रसिद्ध खेल का मुख्य आधार सेबों के साथ लटकता हुआ फल का सदाबहार वृक्ष था, जिसे पैराडाइज ट्री कहा जाता था। जर्मनवासी प्रतीक के रूप में इस वृक्ष
को सजाते थे। यह पैराडाइज वृक्ष ही धीरे-धीरे क्रिसमस के रूप में रूपांतरित होता चला गया।

17 वी शताब्दी के मध्य में अमेरिका में क्रिसमस वृक्ष की सजावट का प्रचलन हुआ। इस परंपरा का सूत्रपात अमेरिका में जर्मन मूल के लोगों द्वारा किया गया । इसके पश्चात 18वीं शताब्दी में एक अंग्रेजी धर्मगुरु बोनीफेस ने ट्यूटोनिका के लोगों द्वारा के पेड़ की अर्चना को क्रिसमस ट्री के रूप में परिवर्तित कर दिया।

राज – परिवार से शुरू हुई क्रिसमस – वृक्ष की परंपरा

इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया के पति राजकुमार एलंटेपिंटो सन 18 41 ईस्वी में अपने राजमहल में क्रिसमस वृक्ष को मोमबत्तियों और कागज के सुंदर फूलों से सजाया और यह समारोह पूरी विराटता और भव्यता के साथ आयोजित किया गया। ब्रिटेन की जनता के सम्राट प्रेमी के स्वभाव के कारण यह परंपरा शीघ्र ही पूरे ब्रिटेन में प्रचलित हो गई थी। फिर हर साल क्रिसमस वृक्ष सजाए जाने लगे। ह आज यह परंपरा ऑस्ट्रेलिया, स्विजरलैंड , फ्रांस आदि कई यूरोपीय देशों में अनवरत जारी है। इसके अतिरिक्त, भारत,
चीन ,जापान आदि एशियाई मुल्कों में भी ईसाई मिशनरियों द्वारा इस प्रथा को बढ़ावा मिला।

हरे-भरे वृक्षों से इंसान के लगाव का प्रतिक है क्रिसमस वृक्ष

क्रिसमस वृक्ष की परंपरा के मूल में अवधारणा यह है कि मनुष्य को सदा से हरे -भरे सदाबहार पेड़ पौधों के साथ एक विशेष अनुराग रहा है। प्राचीन रोमवासी ईसाई धर्म के प्रचलन से काफी पहले से ही वृक्ष -पूजा करते आ रहे हैं। शरद -काल में फसल की बुवाई के बाद हर वर्ष 17 दिसंबर को वृक्ष -वंदना समारोह का आयोजन होता था। लोग अपने प्रियजनों को उपहार व दावतें देते थे संभवत क्रिसमस की सजावट की प्रथा इसी परंपरा का एक प्रतिरूप है ।

क्रिसमस पर वृक्ष सजाने के लिए लाखों हरे-भरे घास काटे जाते हैं। क्रिसमस वृक्ष हेतु अकेले अमेरिका में हर साल लगभग एक लाख वृक्ष काटे जाते हैं।

आज विश्व में सबसे लंबा क्रिसमस वृक्ष वाशिंगटन के नार्थ गेट सेंटर शॉपिंग में स्थापित किया गया है। करीब 220 फुट ऊंचाई वाले डलगस फर वाले इस वृक्ष को सन 1950 में स्थापित किया गया। इस वृक्ष को भव्य कलात्मकता के साथ सजाया गया था। हर प्रकार की रंग- बिरंगी रोशनियों और कागज के फूलों से सजा यह क्रिसमस वृक्ष सचमुच अपने आप में एक अनुपम कलाकृति था।

संसार का सबसे कीमती क्रिसमस वक्ष कई सालों पहले अमेरिका के एक अरबपति ने न्यूयॉर्क के एक प्रसिद्ध होटल में सजाया था। इस वृक्ष के तने को शुद्ध स्वर्ण से मढ़
दिया गया था तथा इसकी हर शाख पर अलास्का की स्वर्ण खदानों से प्राप्त सोने के ढेले लटक रहे थे।

रूस में अठारह वर्ष तक प्रतिबंधित रहा क्रिसमस वृक्ष

रूस में 1917 की क्रांति के बाद क्रिसमस वृक्ष पर प्रतिबंध लगा दिया गया था ,जो 18 वर्ष तक जारी रहा ।18 वर्ष बाद पुनः क्रिसमस वृक्ष सजाने की इजाजत दे दी गई।

अब तो विश्व के हर हिस्से में क्रिसमस वृक्ष बड़े शौक से सजाए जाते हैं ।देखा जाए तो क्रिसमस वृक्ष वर्तमान में क्रिसमस पर्व के अभिन्न अंग बन चुके हैं।