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छिपकलियां: किस्म-किस्म की

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छिपकली प्रायः हर घर में देखने को मिल जाती है। आईये, आज हम आपको कुछ अजीबो गरीब छिपकलियों से मिलवाएं:


देव छिपकली
इंडोनेशिया के कमोड द्वीप में पाई जाने वाली ड्रागोन नामक छिपकली अपने भारी-भरकम शरीर के कारण सचमुच ‘देव‘ कहलाने की हकदार है। यह तेरह-चैदह फुट लम्बी होती है और इसका वजन ढाई सौ पौंड के लगभग होता है। यह कितनी खतरनाक होती है, इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि यह जंगली सूअर, घोड़े और हिरण आदि को समूचा चट कर जाती है। दुनिया में इस से बड़ी छिपकली नहीं पाई जाती ।
चाकू छिपकली
अमरीका में पाई जाने वाली इस छिपकली की दुम लम्बी और चाकू की तरह होती है। यही नहीं, मोर की तरह उसके सिर पर एक सुन्दर कलगी भी होती है। और तो और, यह अद्भुत छिपकली पानी में तैर भी सकती है। तैरने में उसकी लम्बी चाकू जैसी दुम बहुत सहायक होती है।
रंग बदल छिपकली
अमरीका की यह छिपकली भी जब चाहे अपनी पसंद का रंग बदल लेती है और इस प्रकार आसानी से अपने शत्रु को धोखा दे देती है।
सींगदार छिपकली
यह बिल्कुल जरूरी नहीं है कि सींग केवल चैपायों के ही हों। मटियाले रंग की यह छिपकली भी अपने माथे पर चैपायों तरह सींग रखती है। मजे की बात यह है कि चैपायों की तरह ही यह धरती पर रहना पंसद करती है।
शाकाहारी छिपकली
कीड़े-मकोड़े न खाकर घास-फूंस से ही शकाहारी छिपकली जीवन बिताती है। इसका नाम ‘इंगवान‘ है और यह धरती पर नहीं, पानी में रहती है।

जमाखोर छिपकली
आदमी ही नहीं, जानवर भी जमाखोर हो सकते हैं। मैक्सिको में पाई जाने वाली ‘गिले मोंस्टर‘ नामक छिपकली अपनी लम्बी दुम में खाना जमा करती रहती है। यह बहुत खतरनाक होती है।अपने शिकार पर आक्रमण करके यह उससे चिपक जाती है और उसके शरीर में जहर प्रविष्ट करके उसको मार डालती है।
मजदूर छिपकली
यह छिपकली अपनी दुम की सहायता से अपने लिए जमीन में सुरंग बनाती है और फिर आराम से उसके अंदर रहती है। उसकी पीठ पर कांटो की बाड़ होती है।
दाढ़ी वाली छिपकली
इन महोदया को दाढ़ी रखने का शौक है मगर यह दाढ़ी उसी समय प्रगट होती है जब इनको गुस्सा आता है। उस समय इनके गले की नीचे की खाल लटक जाती है, जो दखने में ऐसी लगती है, जैसे दाढ़ी हो।
झालर वाली छिपकली
आठ इंच लम्बी इस छिपकली की पूंछ लगभग दो फुट लम्बी, पतली, चाबुक की तरह होती है। इसकी सबसे अनोखी बात है इसकी गर्दन पर लटकने वाली खाल की ढीली झालर। जब इसे कोई खतरा होता है तो यह छिपकली अपनी टांगों को समेट कर खड़ी हो जाती है और अपने सिर को ऊपर उठा कर अपना मुंह खोल लेती है और तब यह अपनी गर्दन पर लटकी झालर को भी खोलकर एक सख्त कालर की तरह फैला लेती है।
पेड़ पर चढ़ने वाली छिपकली
इस छिपकली का वैज्ञानिक नाम है ‘केमेलियोन‘। यह वृक्षों पर चढ़ने वाली छिपकली है, जो मुख्य रूप से श्रीलंका, अफ्रीका तथा दक्षिणी योरप में पाई जाती है। यह एक कीटभक्षी जन्तु है। कीड़े-मकोड़े, टिड्डे, झींगुर और मकड़ियां इसका प्रिय भोजन है। इसके पैर की अंगुलियां छोटी होते हुए भी सुविकसित होती हैं। आंखंे बड़ी तथा ढक्कन से ढकी होती हैं। सिर पर मुर्गे के समान कलगी होती है।
सबसे मजेदार बात तो यह है कि इसकी जीभ बहुत लंबी होती है। जीभ की लंबाई का पता सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि पूरी निकली हुई जीभ सम्पूर्ण शरीर से भी लंबी होती है। प्राणी-जगत मे ंशायद केमेलियोन की जीभ ही सबसे अधिक लंबी होती है। इस छिपकली की जीभ का अग्र का सिरा फूला हुआ तथा स्त्रावी पदार्थ-युक्त होता है। यह प्राणी जीभ की सहायता से ही शिकार करता है। इस छिपकली में रंग बदलने की अद्भूत क्षमता होती है। थोड़ा-सा छेड़ने मात्र से यह अपना रंग बदल लेती है। केमेलियोन अंडे देती है, किंतु कुछ इसकी जातियां बच्चे भी पैदा करती हैं।