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सस्ता किंतु गुणकारी फल: अमरुद : Guava

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अमरूद एक सस्ता किंतु गुणकारी फल माना जाता है , संभवतः इसी कारण इसे ‘ गरीबो का सेवफल ‘ भी कहा जाता है । वैसे वनस्पति शास्त्र में अमरूद को ‘ सीडियम गुआ जावा ‘ के नाम से जाना जाता है । इसे मिर्टेसी कुल का माना जाता है । अमरूद को संस्कृत में ‘ पेरूक ‘ या ‘ अमरू फल ‘ गुजराती में ‘ जामफल ‘ , मराठी में ‘ पेरू ‘ तेलगू में ‘ गोइया ‘ बंगला में ” पियारा ‘ अरबी में ‘ कमसुरा ‘ , अंग्रेजी में ‘ कॉमन ग्वाइवा ‘ कहा जाता है ।

अमरूद के वृक्ष आमतौर पर 20 से 25 फुट होते होते हैं और इसका तना 10 से 12 इंच व्यास का होता है ।अमरूद के पेड़ का रंग हल्का लालिमा लिए होता है। इलाहाबाद के इर्द गिर्द पाए जाने वाले पेड़ों के अमरुद भीतर से लाल रंग के होते हैं। अमरुद के तने के भीतर की लकड़ी चिकनी और अधिक मजबूत होती है। इसकी लकड़ी से बंदूक के कुंदे बनाए जाते हैं ।

 यह सत्य है कि अमरूद भारत में बेहद लोकप्रिय फल है और यहां इसका प्रचुर मात्रा में उत्पादन होता है । मगर अमरूद मूल रूप से भारतीय फल नहीं है । मूल रूप से यह अमेरिका के उष्ण कटिबंध क्षेत्रों में पैदा होने वाला फल है । कहा जाता है कि अमरूद को सत्रहवीं शताब्दी में पुर्तगाली भारत लाए । यही कारण है कि आयुर्वेद के प्राचीनतम ग्रंथों में हमें इसका उल्लेख नहीं मिलता । किंतु बाद में रचित आयुर्वेदिक ग्रंथों में ‘ निघण्टु रत्नाकर ‘ , ‘ सिद्ध भेषजः ‘ ‘ मणिमाला ‘ आदि में अमरूद के औषधिय गुणों का वर्णन मिलता है । आयुर्वेद के अनुसार , अमरूद वात , पित्त दोषों का शमन करने वाला , मधुर , रूचिकर , शीतल , तृप्तिकारक , शक्तिवर्द्धक , त्वचा का रंग निखारने वाला , कब्ज – नाशक , रक्त शोधक , चर्मरोग नाशक , पाचक और मलेरिया में गुणकारी है ।

 भोजन के पश्चात भली प्रकार से पका अमरूद का सेवन करने से कब्ज की शिकायत दूर होती है । नियमित सेवन से पाचन तंत्र सुचारू सुव्यवस्थित रूप से काम करता है । अमरूद का सेवन हृदय , मस्तिष्क और स्नायु – मण्डल को भी बल प्रदान करता है ।

अमरुद की रासायनिक संरचना :

( प्रति सौ ग्राम में ) जल : 81.7 ग्राम , कार्बोहाइड्रेट : 14.5 ग्राम , प्रोटीन : 0.9 ग्राम , वसा : 0.3 ग्राम , रेशे : 5.2 ग्राम , कैल्शियम : 0.01 ग्राम , मैग्नीशियम 8 मिलीग्राम , फास्फोरस : 42 मिलीग्राम , आयरन : 1 . 4 ग्राम , पोटेशियम : 289 , मिलीग्राम विटामिन सी : 212 मिलीग्राम , नियासिन : 0.2 मिलीग्राम , आग्जैतिक एसिड : 1.4 मिलीग्राम । इसने अलावा प्रति सौ ग्राम अमरूद में 66 कैलोरी ऊर्जा मिलती है ।

विभिन्न रोगों के उपचार में अमरूद का उपयोग :

बवासीर व कब्ज में अमरुद का उपयोग :

  • बवासीर के रोगियों को प्रातः काल भूखे पेट अमरूदों का सेवन करना चाहिए ।
  • एक पाव ताजा अमरूद खाकर गर्म दूध पीने से कब्ज में राहत मिलती है ।
  • कब्ज के रोगी अमरूद को काटकर उस पर सौंठ , काली मिर्च और सेंधा नमक बुरक लें । इससे स्वाद बढ़ने के साथ ही गैस , अफरा और अपच दूर होता है ।
  • दस्त के साथ खून आने पर अमरूद के मुरब्बे अथवा सब्जी का सेवन करना चाहिए ।
  • खूनी बवासीर के रोगी अमरूद के छिलकों को रात- भर पानी में भिगोकर रखे , सुबह इसे खूब उबाल कर पानी को छानकर पीएं , निरन्तर यह प्रयोग करने से लाभ होगा ।
  • पके हुए अमरूद में छेद कर उसमें पांच ग्राम अजवाइन भर कर बंद कर दें । फिर इसे अच्छी तरह भून लें । इसके पश्चात् इस अमरूद को रात्रि में ओस में भीगने के लिए रख दें , सुबह इस अमरूद को खा लें , यह प्रयोग चार दिन करने से बवासीर रोग में शीघ्र लाभ होता है।

खांसी – जुकाम में अमरुद का उपयोग :

  • गर्म रेत में अमरूद को अच्छी तरह भूनकर खाने से कुकर खांसी ठीक होती है ।
  • अमरूद के पत्तों को पानी में उबाल कर उसे दूध व शक्कर डालकर छान लें । यह पेय खांसी में शीघ्र राहत देने में उपयोगी है ।
  • अमरूद के बीजों को सूखाकर चूर्ण बना लें , इस चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर सुबह -शाम सेवन करें । इस दौरान तेल व खटाई से परहेज करें । खांसी की यह लाभकारी औषधि है ।
  • सूखी खांसी में पके हुए अमरूद को खूब चबा चबाकर खाना चाहिए ।

दंत – रोग में अमरुद का उपयोग :

  • दांतों में दर्द होने पर अमरूद के पत्तों को धोकर चबाने से आराम मिलता है ।
  • अमरूद के पत्तों को पानी में उबालकर उस पानी से गरारे करने से मसूड़ो की सूजन में राहत मिलती है । अमरूद के हरे ताजा नर्म पत्ते चबाते रहने से मसूड़ों के दर्द और  मुंह के छालों में आराम मिलता है ।
  • कच्चे अमरूद में पाए जाने वाले रासायनिक तत्व तथा विटामिन सी की प्रचुरता मसूड़ों से खून निकलने को रोकती है ।

विभिन्न रोगो में अमरुद का उपयोग :

  • घबराहट तथा खून की कमी जैसे रोगों में प्रतिदिन एक पका हुआ अमरूद खाली पेट खाना चाहिए ।
  • पके हुए अमरूद को दूध व शहद के साथ सेवन करना उत्कृष्ट प्राकृतिक कैल्शियम तथा विटामिन सी से भरपूर टानिक का काम करता है , बच्चों , गर्भवती स्त्रियों आदि के लिए यह विशेष लाभकारी है।
  • मलेरिया और ज्वर में अमरूद का सेवन लाभप्रद है ।
  • अमरूद के हरे पत्ते तथा कत्था चबाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं ।
  • भांग , चरस , गांजा , अफीम आदि का नशा अधिक हो जाने पर अमरूद का सेवन करने से नशा उतर जाता है ।
  • नशा उतारने के लिए अमरूद के पत्तों के रस का भी उपयोग किया जाता है । पेट में दर्द होने पर अमरूद का सफेद गूदा नमक के साथ सेवन करना चाहिए ।
  • अमरूद का नियमित सेवन, हृदय तथा मस्तिष्क को शक्ति तथा स्फूर्ति प्रदान करता है तथा उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करता है ।
  • अमरूद के छोटे – छोटे टुकड़े पानी में डाल दें । कुछ समय बाद उस पानी को छान कर पीएं । इससे मधुमेह का शमन होता है ।
  • एक पके हुए अमरूद को रात – भर पानी में डालकर रखें तथा सुबह खाली पेट खूब चबा – चबाकर खा लें । इससे मस्तिष्क की गर्मी दूर होती है ।

अमरूद के पत्तों को पीसकर उसकी पेस्ट बनाकर बच्चों के मल द्वार पर बांधने से उनका गुदांश अर्थात कांच  निकलने का रोग ठीक हो जाता है ।

अमरूद को धीमी आंच पर भूनकर खाने से आंखों से पानी बहना थम जाता है ।

अमरुद के सेवन में परहेज / सावधानियां :

  • अमरूद का सेवन शाम को या रात्रि को नहीं करना चाहिए क्योंकि यह प्रकृति में शीतल व भारी होता है ।
  • अमरूद के बीजों को फेंकना नहीं चाहिए । इनमें प्रचुर मात्रा में आयरन होता है । एक बार में अधिक मात्रा में अमरूद न खाएं । उदर रोगों और बहुत कमजोर प्रकृति के लोगों को अमरूद का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए ।
  • सर्दी – जुकाम , श्वास , खांसी , कफ प्रधान रोगों से पीड़ित व्यक्ति अमरूद के सेवन से परहेज करें तो बेहतर होगा।
  • अधिक कच्चे और सड़े – गले अमरूद का सेवन लाभ के स्थान पर हानि पहुंचा सकता है ।
  • अमरूद छिलके सहित खाना चाहिए ।