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बेचारा लुहार !

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चीन देश के हुनान राज्य के चांगशा नगर में चेनचिंग नाम का एक लुहार रहता था। वह लड़ाई के काम में आने वाली चीजें जैसे तलवार, भाला, बरछी, ढाल आदि बनाया करता था। इन चीजों के बेचने का तरीका भी उसका अपना ही था। चेनचिंग बड़ा बातूनी था। वह अपनी दुकान के सामने खड़ा हो जाता और लच्छेदार भाषा में अपने हथियारों की तारीफ में जमीन-आसमान के कुलाबे मिलाने लगता। उसकी मजेदार बातें सुनने को अक्सर उसकी दुकान के सामने मजमा लग जाता था और इसमें से कभी-कभी कोई खरीदार भी निकल आता था। उसका घर भी दूकान के पीछे ही था।
एक दिन चेनचिंग ने बड़े सवेरे ही अपनी दुकान के आगे मजमा लगा लिया और एक बरछा हाथ में लेकर उसका बखान शुरू कर दिया, ‘‘ मेहरबान, आपने बरछे तो बहुत देखे होंगे, इस्तेमाल भी किये होंगे, लेकिन ऐसा बरछा न देखा होगा। अहा हा! इतना लंबा होने पर भी फूल जैसा हल्का! चलाओगे तो हवा में ऐसा उड़ता हुआ जायेगा, जैसे तैर रहा हो। और इस बरछे का फल, उसका तो कहना ही क्या! ऐसा मजबूत और पैनी धार का कि नजर तक फिसल जाये। दुनिया में कोई ऐसी चीज, धातु या ढाल नहीं है, जिसे छेदकर यह बरछा आर-पार न निकल जाये। ऐसा बरछा अभी दुनिया में कहीं और कभी नहीं बना।‘‘
इतना कहकर चेनचिंग ने मजमे में नजर दौड़ाई। उसे एक व्यक्ति चेहरे से उत्सुक दिखाई पड़ा। चेनचिंग ने उससे पूछा, ‘‘तुम्हें लेना है यह बरछा?‘‘
उस व्यक्ति ने उत्तर दिया कि बरछा तो उसे नहीं चाहिए, हां वह ढाल जरूर खरीदना चाहता है।
चेनचिंग ने बरछा अपनी दूकान की दीवाल के सहारे टिका दिया और दीवाल पर टंगी ढालों में से एक उठाकर हाथ में ले ली और लगा उसकी तारीफ में दून की हांकने, ‘‘तुम्हें ढाल चाहिए मेरे प्यारे दोस्त, तो यह है तुम्हारे लिए ढाल, ऐसी ढाल न अभी तक बनी है और न बनेगी। कछुए की पीठ और गैंडे की खाल से ज्यादा मजबूत है यह ढाल। जब तक यह तुम्हारे हाथ में रहेगी, कोई हथियार तुम्हारा बाल भी बांका नहीं कर सकेगा। दुनिया में कोई ऐसा भाला, बल्लम, बरछा, तीर या तलवार नहीं है, जिसका भरपूर वार करने पर भी इस ढाल पर खरोंच ही आ जाये, इसका टूटना या इसमें छेद होना तो दूर की बात है।‘‘
मजमे में खड़े लोगों में एक छोटा बच्चा भी था। चेनचिंग की बातें सुनकर वह अचानक आगे बढ़ आया और जैसे ही चेनचिंग बोलते-बोलते रूका, उस बच्चे ने कहा, ‘‘वाह बड़े मियां, जवाब नहीं तुम्हारा, और न तुम्हारे बरछे और ढाल का। एक ओर तो तुम कहते हो कि दुनिया में कोई चीज ऐसी नहीं है, जिसको छेदकर यह बरछा आर-पार न निकल जाये और दूसरी ओर अपनी ढाल के लिए कहते हो कि दुनिया में ऐसा कोई हथियार नहीं, जिससे उस पर खरोंच भी आ सके। ऐसा क्यों नही करते कि अपनी ढाल पर अपना बरछा चलाकर दिखा दो तो पता चले कि क्या चीज तुम्हारे कहे मुताबिक है।‘‘
चेनचिंग उस बच्चे की बात सुनकर एक क्षण चुप रहा। फिर उसने इस प्रकार की मुद्रा बनायी, जैसे कहीं दूर से आ रही आवाज को सुनने की कोशिश कर रहा हो। इसके बाद मजमे की ओर मुंह करके कहा, ‘‘माफ करना भाइयो, मेरी बीवी मुझे फिर बुला रही है। लगता है, वह दूकानदारी नहीं करनेे देगी!‘‘ इतना कहता हुआ वह दूकान में से होकर भीतर अपने घर में घुस गया।
दूकान के सामने खड़े मजमें के लोग कुछ देर तो ‘हो-हो‘ करके ठहाके लगाते रहे, फिर वहां से धीरे-धीरे खिसक गये।