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स्नान

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स्त्री और पुरूष दोनों की त्वचा में ऐसी ग्रंथियाँ होती हैं, जिनकी वजह से शरीर की गंदगी बाहर निकल कर त्वचा पर फैलती जाती है और इन ग्रंथियों में ऐसी ग्रंथियां भी होती हैं जो अपने तैलीय प्रभाव से त्वचा पर झुर्रियां नहीं पड़ने देतीं और उसे सूखने नहीं देतीं। यह ग्रंथियां लगभग 50 लाख होती हैं।
इन ग्रंथियों के निरंतर कार्य करते रहने के कारण शरीर पर मैल जमा हो जाती है। इस मैल को साफ करने के लिए नहाना एक आवश्यक क्रिया है। जहां पसीना त्वचा को ठंडा रखने मे मदद करता है, वहां तेल त्वचा को प्रभावित करके त्वचा को हानिकारक तत्वों के प्रभाव से बचाता है। त्वचा पर फैला पसीना और तेल हवा में घुले-मिले धूल-कणों की ओर शीघ्र आकर्षित हो जाता है और त्वचा पर जमती धूल की ओर ध्यान न दिया जाये तो धूल की परतें त्वचा पर चढ़ती जाती हैं और त्वचा अपना आकर्षण खो बैठती है। त्वचा को गंदगी से मुक्त करने के लिए कई प्रकार के स्नानों का विधान है, लेकिन साधारण जल से किया गया स्नान अति उत्तम है। दिन भर की मेहनत के बाद रात सोने से पूर्व गुनगुने पानी से किया गया स्नान बहुत लाभकारी होता है। स्नान करते समय यह प्रयत्न किया जाना चाहिए कि जल का तापक्रम वायुमंडल के तापक्रम के बराबर हो। लेकिन आवश्यकता पड़ने पर इस तापक्रम में फेरबदल भी किया जा सकता है। यदि स्नान बाथ टब में किया जाए तो विशेष आरामदायक होता है।
त्वचा की सुरक्षा के लिए ध्यान रखना चाहिए कि जो साबुन प्रयोग में लाया जा रहा है, कहीं उसमें कास्टिक सोड़ा की मात्रा अधिक तो नहीं है। साबुन मलते समय त्वचा पर झाग पैदा करना चाहिए। झाग पूरे शरीर पर मलते रहने के बाद शरीर को धो देना चाहिए। टब में स्नान करने वाली महिलाएं टब में आराम करने के साथ स्नान भी कर सकती है। टब में यू. डी. कोलीन मिला लिया जाए तो शरीर में महक दौड़ती रहती है। मुगल बादशाहों की रानियों के स्नान के पानी में सैंकड़ो गुलाब के फूल तैरा करते थे। सांवले रंग की होने पर भी क्लियोपेट्रा स्नान की बहुत शौकीन थी। क्लियोपेट्रा बकरी के दूध से स्नान किया करती थी। सौन्दर्य के मामले में नेपोलियन की महारानी और स्पेन की प्रसिद्ध सुंदरी मारिया भी पीछे नहीं रही। नेपोलियन की महारानी स्नान करते समय पानी में पिसी हुई स्ट्राबेरियां मिला लिया करती थी और स्पेन की विश्व विख्यात सुंदरी मारिया पानी में शैम्पेन मिला कर स्नान करती थी। स्नान करने से पहले यदि शरीर पर किसी उत्तम तैल से मालिश कर ली जाये तो त्वचा में अधिक निखार आता है। तेल मालिश करते समय हाथ तेजी से न चलाकर हल्के-हल्के चलाना चाहिए।
गर्मियों में स्नान दो-तीन बार तक किया जा सकता है। त्वचा पर अतिरिक्त चमक पैदा करने के लिए बेसन अति उपयुक्त माना गया है। अंडे की जर्दी भी लाभदायक होती हैं। स्नान से पहले त्वचा पर हल्दी का लेप करके भी त्वचा की चमक और आकर्षण बढ़ाया जा सकता है। हमारे देश में विवाह से पूर्व युवतियां और विवाहित महिलाएं भी हल्दी से अपनी त्वचा को दमकाती हैं। कई महिलाएं सूर्य स्नान भी करती है लेकिन यह स्नान इसलिए उपयुक्त नहीं माना जाता क्योंकि धूप के कारण शरीर सांवला पड़ जाता है, लेकिन शरीर को विटामिन डी उपलब्ध कराने के लिए सूर्य स्नान ठीक रहता है। सोना बाथ- यानी भाप स्नान भी महिलाएं करती हैं। लेकिन साधारण जल से किया गया स्नान अन्य सभी विधियों से श्रेष्ठ और उत्तम माना गया है।

द्वारा राज स्टेशनर्स, पचपहाड़ रोड़
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