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बढ़ती उम्र में खूबसूरती कैसे बनी रहे?

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किशोरावस्था के बाद जब आप युवावस्था की ओर बढ़ती हैं तो मन में एक अजीब उत्साह, जिज्ञासा, उमंग और आंखों में अनेक रंगीन सपने होते हैं। युवावस्था में प्रवेश के बाद आप सांसारिक सुख और पारिवारिक बंधनों में इतनी खो जाती हैं कि पता ही नहीं चलता कि जीवन का यह स्वर्णिम काल कब अपने अंतिम चरण पर आ पहंुचता है और आप अपने को वृद्धावस्था की दहलीज पर खड़ा पाती हैं। यह सोचकर आप मन-ही-मन भयभीत हो उठती हैं कि अब शारीरिक सौंदर्य धीरे-धीरे आपके लिए अतीत की बात बन जायेगा।
यह सारी प्रक्रिया कैसे और कब शुरू होती है, आपको पता नहीं चलता। वैसे देखने में आप अब भी पहले जैसी सुन्दर, छरहरी, चुस्त और आकर्षक हैं। आपकी शारीरिक शक्ति वैसी ही है। मेहनत से आपको थकान भी नहीं होती। आपके दाम्पत्य जीवन के सुख में भी कमी नहीं है। संक्षेप में अभी आप काफी जीवट और जिंदादिल हैं, फिर भी आंखों के कोनों पर हल्की-सी दो-चार झुर्रियां दिखाई देने लगी हैं, आपके नाखूनों पर हल्का खुरदरापन आने लगा है और हाथों पर हल्की नसें उभरने लगी हैं। वृद्धावस्था के अनेक लक्षण में से कुछ लक्षण ये हैं । इनके अतिरिक्त अन्य कुछ लक्षण भी हैं। आखों के कोनों की ये झुर्रियां गहरी होकर फैलने लगती हैं, ठोड़ी के नीचे मांस लटकने लगता है, चेहरे की त्वचा की ऊपरी सतह खुरदरी और पतली होने लगती है, त्वचा की रंगत और लचीलापन कम होेने लगता है। यदि आप गालों पर उंगली गड़ाकर गड्डा बनाएंगी तो वह युवावस्था में एकदम भरने के बजाए धीरे-धीरे अपनी पूर्वावस्था में आयेगा। बाल, विशेषकर बगलों आदि के, पतले होने लगते हैं। स्त्रियों के चेहरे, विशेषकर ऊपरी होंठ पर बाल निकलने लगते हैं। चेहरे और शरीर पर अनेक तिल निकलने लगते हैं। त्वचा पसीने और तैलीय पदार्थ की कमी के कारण शुष्क होने लगती है।
आवश्यक नहीं कि ये लक्षण एक व्यक्ति में दिखाई दंे, किन्तु इनमें से कोई भी लक्षण इस बात का परिचायक है कि आपकी उम्र का उतार आरंभ हो गया है। किन्तु चिंता की कोई बात नहीं । इस चेतावनी के मिलते ही यदि आप सावधान हो जायेंगी और उपयुक्त उपाय करेंगी तो वृद्धावस्था की अधिक समय तक टाला जा सकता है।
वृद्धावस्था कब शुरू होती है?
सदियों से चिकित्सकों और वैज्ञानिकों ने यह जानने का प्रयास किया है कि वृद्धावस्था क्या है? कब शुरू होती है? इसके आरंभ होने पर शरीर में क्या परिवर्तन होते है और क्यों होते हैं?
वृद्धावस्था क्या है और इसके कारण शरीर में जो परिवर्तन होते हैं, ये सभी जानते हैं। किन्तु वृद्धावस्था के कारण शरीर में जो परिवर्तन होने लगते हैं, वे क्यों होते हैं और कैसे होते है-यह अभी तक रहस्य है। कुछ लोगों में वृद्धावस्था के लक्षण 30-32 की उम्र में ही पैदा हो जाते हैं, जबकि कुछ में 50 की उम्र तक भी ये लक्षण प्रकट नहीं होते। वृद्धावस्था के कारणों का जब तक पता नहीं लग पाता, तब तक उसे सदा के लिए रोका नहीं जा सकता। किन्तु चिकित्सक और वैज्ञानिक वृद्धावस्था को कुछ समय तक टालने में अवश्य सफल हो गए हैं। इस सम्बन्ध में अनेक रासायनिक परीक्षण किए जा रहे हैं और संभव है भविष्य में कुछ ऐसी दवाओं का आविष्कार हो सके, जिनसे स्थाई रूप से वृद्धावस्था के लक्षणों को रोका जा सके।
वैज्ञानिकों, चिकित्सकों और सौंदर्य विशेषज्ञों के अनुभव के अनुसार शरीर की त्वचा पर प्रकट होने वाले वृद्धावस्था के अनेक लक्षणों के मुख्य तीन कारण है। धूप में (त्वचा का) आवश्यकता से अधिक रहना। दूसरा कारण चिंता और मानसिक तनाव। तीसरा कारण, बढ़ती हुई आयु के अनुसार पौष्टिक आहार मंे कमी है। तेज धूप में अधिक समय तक रहने से त्वचा पर बहुत अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। धूप में इन्फ्रारेड तथा अल्ट्रा वाइलेट किरणें होती हैं। ये त्वचा के लिए आवश्यक भी हैं। अल्ट्रा वाइलेट किरणे त्वचा में विटामिन ‘डी‘ उत्पन्न करती हैं, किन्तु यही किरणें अधिक समय पड़ने से त्वचा पर सनबर्न (झुलसन) उत्पन्न करती है। सनबर्न श्वेत त्वचा वालों को अधिक असर करता है। तेज धूप से 6 से 8 वर्ष के बच्चों, 25 से 30 वर्ष की महिलाओं और 30 से 35 वर्ष के पुरूषों की त्वचा को हानि पहुंचने का अधिक खतरा रहता है। सूर्य की किरणें दोपहर 12 से 2 बजे तक सबसे अधिक प्रखर होती हैं क्योंकि उस समय सूर्य आकाश में ठीक सिर के ऊपर होता है और उसकी किरणें धरती पर सीधी पड़ती है । इसी समय त्वचा को धूप से बचाना चाहिए।
चिंता और मानसिक तनाव आज के शहरी जीवन के आवश्यक अंग बन गये हैं । इस उम्र में अनेक आर्थिक समस्याएं जैसे: बच्चों की उच्च शिक्षा, उनके विवाह के लिए धन की व्यवस्था आदि आ जाती है। व्यक्ति के नाड़ी-संस्थान पर इनका बहुत गहरा असर पड़ता है। अन्ततः जिसका असर शरीर की त्वचा पर भी दिखाई पड़ता है। महिलाओं में मानसिक तनाव के कारण मासिक धर्म सम्बन्धी गड़बड़ियां पैदा हो जाती हैं, जिससे चेहरे पर झांइयां और झुर्रियां दिखाई पड़ने लगती हैं।
बढ़ती हुई आयु के साथ संतुलित भोजन का मिलना बहुत आवश्यक है। बढ़ती हुई उम्र में शारीरिक शक्ति को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, किन्तु देखा गया है कि बढ़ती हुई उम्र के साथ लोग भोजन की ओर से उदासीन हो जाते हैं। वे कम खाने लगते हैं। उनकी यह धारणा बन जाती है कि अब बुढ़ापे में क्या अच्छा खाएं-पिएं। इस प्रकार लोग शरीर के लिए आवश्यक संतुलित आहार की ओर ध्यान न देकर जो कुछ भी मिला या घर में बना वही खा लेते हैं, इस प्रकार आहार-सम्बन्धी गड़बड़ी के कारण त्वचा पर बुरा असर पड़ता है। त्वचा की प्राकृतिक चमक कम होती जाती है।
चिकित्सकों और सौंदर्य विशेषज्ञों के अनुसार उचित आहार और विटामिनों के अतिरिक्त प्रयोग से त्वचा के सौंदर्य को बढ़ती हुई उम्र के बावजूद अधिक समय तक कायम रखा जा सकता है। आयुविज्ञान के एक शोधकर्ता डा0 बेंजामिन फै्रंक के अनुसार भोजन में रिबोन्यूकलीक एसिड प्यूरीन के साथ विटामिन ‘बी‘ कम्पलेक्स की कैप्सूल देने से वृद्ध होती हुई त्वचा को भी सुधारा जा सकता है।
क्या करें, क्या न करें?
उम्र के उतार के समय सावधानी बरतने से त्वचा सुंदर और चमकदार बनी रहती है। यही नहीं, यदि किसी कारण त्वचा पर वृद्धावस्था की छाप पड़ने लगी है तो भी उसे उपचार और सावधानियों द्वारा ठीक किया जा सकता है। उपचार के लिए किसी त्वचा-रोग विशेषज्ञ की राय लेनी चाहिए। कई बातों को करने या न करने से आप अपनी त्वचा की रक्षा स्वयं भी कर सकती हैं।
क्या न करें: (1) अधिक समय तक तेज धूप से अपनी त्वचा को बचाएं। यदि धूप में जाना ही पड़े तो छाते, लेडिज हैट का प्रयोग करें।
(2) ऐसा न सोचे कि भोजन पर नियत्रंण केवल वजन को नियंत्रण में रखने के लिए किया जाता है। पौष्टिक आहार त्वचा के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है। अतः भोजन में प्रोटीन, वसा, फल, शाक-सब्जी, विटामिन्स तथा खनिजों की कमी न होने दें। मांडयुक्त भोजन को अधिक न ले।
(3) अनावश्यक अथवा जबर्दस्ती न मुस्कराएं और न ही मुंह को बिगाडे़ं। इससे चेहरे पर झुर्रियां पड़ सकती हैं। स्वाभाविक रूप से मुस्कराना या हंसना हानिप्रद नहीं होता।
(4) अधिक द्युम्रपान न करें। इन दिनों महिलाओं में द्युम्रपान के प्रति आकर्षण बढ़ता जा रहा है। इससे त्वचा पर झुर्रिया पड़ने का खतरा रहता है।
क्या करें:
(1) त्वचा को सदा स्वच्छ रखें। साबुन का कम-से-कम प्रयोग करें और जहां तक हो सके, त्वचा को ठंडे अथवा गुनगुने पानी से धोएं। त्वचा को तेज डिटर्जेन्ट से कभी न धोएं। त्वचा को स्वच्छ रखने के लिए क्लीन्जिग क्रीम का प्रयोग करना चाहिए।
(2) अपने शरीर के सौंदर्य के रख-रखाव के लिए कुछ बातें नियमपूर्वक करें: इनसे आपको आराम भी मिलेगा और लाभ भी होगा। अपने हाथों और पैरों के नाखूनों को सदा छोटे और साफ रखें। इससे न तो कभी आपकी त्वचा में खरोंच आएगी और न ही नाखूनों के फटने से या खुरदुरे होने से आपकी त्वचा को हानि होगी। नाखूनों को स्वच्छ रखने के लिए कैल्शियम तथा विटामिन ‘बी‘ काॅम्पेक्स लाभदायक रहते हैं। इसके अतिरिक्त सर्दियों, गर्मियों और वर्षा ऋतु के अनुसार अपने चेहरे और शरीर की त्वचा का विशेष रख-रखाव करें।
(3) आंखों के भेंगेपन से चेहरे पर झु र्रिया पड़ने लगती है। यदि भेंगेपन का आभास हो तो तुरंत किसी नेत्र-विशेषज्ञ से परामर्श कर उपचार करना चाहिए।
(4) अपने निवास स्थान, विशेषकर, सोने के कमरे में सही तापक्रम रखिए। सर्दी के दिनों में कमरे को हीटर आदि के द्वारा गर्म रखना चाहिए।
(5) यदि किसी शारीरिक कारणों से अथवा बीमारी के कारण आपको मना न किया गया हो तो नित्य शारीरिक व्यायाम अवश्य करना चाहिए। इससे खून का दौरा तेज होता और त्वचा पुष्ट होती है। प्रातः काल टहलना, तेज चलना, बाहरी खेल खेलना, (आउटडोर गेम) भी लाभदायक होते हैं। घर के काम-काज से भी आवश्यक व्यायाम हो जाता है। योग अभ्यास करने से भी त्वचा लोचदार और कांतिपूर्ण होती है।
अन्य उपचार
ढलती हुई उम्र में चेहरे की त्वचा पर पड़ी झुर्रियों के उपचार के लिए यूरोपीय देशों में पारम्परिक तरीकों के अलावा शल्य-चिकित्सा और रासायनिक इलाज का प्रचलन काफी बढ़ गया है। वहां इस क्षेत्र में नए-नए परीक्षण भी होते रहते हैं। इसके लिए प्लास्टिक सर्जरी बहुत उपयोगी सिद्ध हुई है। इसके द्वारा लटकती हुई झुर्रीदार त्वचा को तानकर सीधा करते है और अतिरिक्त त्वचा को कान के पीछे शल्य क्रिया द्वारा निकाल देते हैं और किनारों को जोड़कर ठोड़ी और गालों की त्वचा फिर से झुर्रियों-रहित बना दी जाती है, किन्तु यह विधि स्थाई लाभ नहीं दे पाती।
इसके अतिरिक्त सिलाकोन के इंजेक्शनों के द्वारा भी झुर्रियों को ठीक किया जाता है। यह विधि अधिक प्रचलित नही हो सकी क्योंकि इससे त्वचा पर प्रतिक्रिया होने का खतरा रहता है। केमो सर्जरी, जिसे ‘त्वचा को छीलना‘ कहते हैं, के द्वारा भी झुर्रियों को दूर किया जाता है। इसमंे एक रासायनिक लेप द्वारा त्वचा की ऊपरी परत हट जाती है और भीतरी सतह पर कुछ सूजन-सी आ जाती है, जिससे झुर्रियां दूर हो जाती है। यह चिकित्सा भी स्थाई नहीं है और इससे गहरी झुर्रियां दूर नहीं होतीं।
इसी प्रकार ‘स्किन प्लानिंग‘ द्वारा भी चेहरे की खुरदुरी त्वचा को ठीक किया जाता है। यह कष्टदायक तरीका है। इसमें चेहरे की त्वचा को मशीन द्वारा एकसार बना देते हैं। इस उपचार में कई सप्ताह लग जाते हैं। इन सभी विधियों के लिए कुशल चिकित्सकों का होना आवश्यक है।
अंत में, मन में, वृद्धावस्था के प्रति गलत धारणा न बनायें। यह वह अवस्था है, जो अंत में सभी के जीवन में आती है। इसे रोका नहीं जा सकता, केवल टाला भर जा सकता है अथवा इसके आने की प्रक्रिया को जहां तक हो सके धीमा किया जा सकता है। इस प्रक्रिया से गुजरते हुए आंतकित नहीं होना चाहिए बल्कि एक आनंद और मौज मस्ती के रूप में स्वीकार करना चाहिए। जब तक आपका इस प्रकार का सकारात्मक दृष्टिकोण रहेगा, तब तक बुढ़ापा आपसे दूर भागेगा।
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