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सेबफल |Apple’s information in Hindi

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सैंबफल अमरूद तथा नाशपती तीनों एक ही प्रजाति के फल हैं। किंतु सेबफल अपनी रासायनिक संरचना के आधार पर अन्य फलों के मुकाबले कहीं अधिक उपयोगी और पौष्टिक है। सेबफल संसार में लगभग सर्वत्र उपलब्ध है। भारत में कमशः काश्मीरी तथा काबुली प्रजातियों के सेबफल पाए जाते हैं। काश्मीरी सेब स्वाद में मीठा होता है, जबकि काबुली सेब में मामूली खट्टापन होता है।

सेबफल न केवल एक स्वादिष्ट और रूचिकर फल है अपितु यह अपने औषधीय गुण धर्म के कारण भी अत्यंत उपयोगी फलों की श्रेणी में माना जाता है। एक अंग्रेजी कहावत के अनुसार, रोजाना एक सेबफल खाना डाक्टरों से दूर रहने का अचूक नुस्खा है।

जिगर की बीमारियों में सेबफकल एक रामबाण औषधि है। पथरी तथा पेट की अन्य बीमारियों के समय सेबफल का सेवन आश्चर्यजनक लाभ पहुंचाता है। बहुमूत्र रोग, अनिद्रा, गले के घाव सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, स्मरण-शक्ति का ह्यास, जर, जलन, नेत्र विकार आदि रोगों में सेबफल का सेवन लाभ पहुंचाता है।

रासायनिक संरचना :

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प्रोटीन 0.3 प्रतिशत, फैट 0. प्रतिशत, कैल्शियम 0.] प्रतिशत, आयरन १.6 प्रतिशत, सेबफल में प्राकृतिक शर्करा 9 से 9 प्रतिशत पाई जाती है। इसके अतिरिक्त सोडियम पोटेशियम, मैग्नीशियम ‘सी” थियामिन सल्‍्फर आदि तत्व भी इसमें पाए जाते है

विभिन्‍न रोगों के उपचार में सेबफल का उपयोग :

हृदय सम्बन्धी रोग :

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  • दिल की कमजोरी, दिल बैठना जैसे रोग में 5 दिनों तक सुबह शाम सेब का मुरब्बा खाना चाहिए।
  • उच्च रक्तचाप के रोगी प्रतिदिन सुबह शाम एक-एक अच्छी तरह पके हुए सेब का सेवन फरें ।
  • निम्न रक्तचाप की स्थिति में सेब के मुरब्बे का नियमित सेवन लाभदायक है।
  • तेब में पोटेशियम व फास्फोरस की प्रचुर मात्रा हृदयाघातै के खतरे को नियंत्रित करती है।

मानसिक व मस्तिक सम्बन्धी रोग :

  • सेब का नियमित सेवन मानसिक अवसाद को कम करने में सहायक होता है।
  • भोजन से पूर्व प्रतिदिन एक सेब छिलके सहित खाने से दिमागी कमजोरी दूर होती है।
  • सुबह खाली पेट सेब का मुरब्बा नाश्ते में लेने से स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है।
  • तीव्र स्मरण-शक्ति के लिए बिना छिले सेब का सेवन भी उपयोगी है।

अन्य :

  • टायफाइड रोग में सेब का रस अत्यन्त लाभकारी है।
  • पथरी के रोगियों को नियमपूर्वक सेब का सेवन करना चाहिए। सेब का रस पीने से पथरी
  • बनना बंद हो जाता है, तथा बनी हुई पथरी भी बाहर निकल जाती है।
  • नींद नहीं आने की शिकायत होने पर सेब के मुरब्बे का शयन से पूर्व सेवन करना चाहिए।
  • भूखे पेट छिलके सहित सेब खाने से कब्ज दूर होती है। सेब खाने से पेट के कीड़े भी मर जाते हैं।
  • पुरानी और सूखी खांसी के रोगी अच्छे पके हुए लाल सेब खाएं।# बुखार व मलेरिया होने पर सेब खाने से ज्वर शांत हो जाता है।
  • नियमित रूप से सेब खाने से दांतों और मसूढ़ों का व्यायाम हो जाता है तथा सेब के
  • कीटाणुनाशक तत्व दांतों व मसूढ़ों को सड़ने से बचाते हैं।
  • कच्चे सेब के रस में चुटकीभर नमक मिलाकर पीने से उल्दी आना रूक जाता है।
  • अपच और भूख नहीं लगने पर सेब के रस में मिश्री मिलाकर पीना चाहिए।
  • सेब के रस का नियमित सेवन करने से शराब की लत छुड़ाई जा सकती है।
  • शराब का नशा अधिक चढ़ जाने पर एक सेब खिलाने से नशा मद्धम पड़ जाता है।
  • बिच्छू के काटने पर डंक के स्थान पर सेब को पीसकर लेप करें तथा सेब का कुछ भाग रोगी को खिला दें।
  • गले के जख्म होने पर पके सेब का रस निकाल कर चम्मच से गले में टपकाएं रस को
  • गले में रोके रखें। इससे जख्म जल्दी भर जाएगा।
  • टी.बी. के रोगियों के लिए सेब एक बहुउपयोगी फल है।
  • शरीर के मस्सों पर खट्टे सेब का रस मलने से मस्से गिर जाते हैं।
  • बहुमूत्र रोग होने पर डेढ़ माह तक नियमित रूप से प्रतिदिन एक सेब का उपयोग करें।
  • तेब का रस ज्वर की गर्मी, बेचैनी, प्यास, जलन व थकान को तत्काल मिटाता है।

परहेज / सावधानियां :

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  • सेब के व्यंजन आदि बनाने की प्रकिया में उसके कई पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि सेबफल का सेवन उसके प्राकृतिक रूप में ही किया जाए।
  • सेवन से पूर्व इतमीनान कर लें कि कहीं सेब फल सड़ा गला या कीड़ा लगा तो नहीं है?
  • सेब अच्छा पका हुआ व मीठा होना चाहिए। अधिक रसयुक्त सेब उत्तम व माना गया है।
  • सेब को भोजन से पूर्व सेवन करना उचित है।
  • सेब के सेवन के तत्काल बाद पानी न पीएं।