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Amazing memory | अद्भुत स्मरण शक्ति

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Amazing memory

स्मरण शक्ति (Amazing memory) के अनबूझे रहस्य

अनगिनत यादों और जानकारियों का एक रहस्यमय खजाना है – हमारा  मस्तिष्क! इस मायावी मस्तिष्क की असंख्य क्षमताओं में ‘स्मरण-शक्ति’ का महत्वपूर्ण योगदान है। आज हमारे वैज्ञानिक याददाश्त के उलझे रहस्यों को सुलझाने में लगे हुए हैं। आखिर कोई बात या घटना हमें क्‍यों और कैसे याद रह जाती है? क्‍यों छोटी-सी बात का चित्र बरसों तक हमारे मानस-पटल पर ज्यों का त्यों बना रहताहै? इन सारे सवालों का जवाब है -मनुष्य की स्मरण-शक्ति। स्मरण-शक्ति के अनबूझे रहस्यों पर से अभी कई पर्दे उठने बाकी हैं।

अद्भुत स्मरण शक्ति(Amazing memory) के धनी लोग

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Amazing memory

स्मरण-शक्ति सामान्यतः प्रत्येक मनुष्य में पाई जाती है, किंतु स्मरण-शक्ति की तीव्रता और विलक्षणता के मापदंड प्रायः व्यक्तिशः अलग-अलग होते हैं। कुछ लोगों में स्मृति की प्रखरता इतनी व्यापक और तीक्ष्ण होती है कि उसे चमत्कार समझा जाता है। अक्सर विलक्षण स्मरण-शक्ति वाले व्यक्तियों में यह प्रतिभा जन्मजात होती है। आइए, आज हम आपको अद्भुत स्मरण-शक्ति सम्पन्न कुछ ऐसे  व्यक्तियों से मिलवाते हैं, हजार जिनकी याददाश्त के हैरत अंग्रेज कारनामे देखकर लोग  दांतो तले अंगुली दबा लेते हैं।

मिस्त्र के सुलतान नासिर अद्भुत स्मरण-शक्ति के धनी थे। उनके पास बीस हजार गुलाम थे। सुल्तान नासिर को उनमें से प्रत्येक का नाम, जन्म-स्थान, जाति, उम्र और उनके खरीदे जाने का स्थान, समय और राशि जुबानी याद थे। प्राचीन ग्रंथों में राजा भोज के राज-दरबार के श्रुतिधर नामक दरबारी का  वर्णन मिलता है। श्रुतिधर की स्मृति इतनी विलक्षण थी कि वह एक घड़ी (चौबीस  मिनट) तक सुने गए किसी भी प्रसंग या धर्म-ग्रंथ को तत्काल अक्षरशः सुना सकता था।

दस हजार पुस्तकें कंठस्थ

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Amazing memory

दक्षिण अफ्रीका के फील्ड मार्शल जनरल स्मट्स साहित्यानुरागी व्यक्ति थे। उनके पास उच्च कोटि की करीब दस हजार पुस्तकों का विशाल भंडार था। स्मद्स  को अपने पुस्तकालय की समस्त पुस्तकों का एक-एक शब्द कंठस्थ था। वह पुस्तक के किसी भी अंश की पृष्ठ संख्या और अन्य विवरण तत्काल बता सकते थे।

इसी  प्रकार जर्मनी में म्युनिख शहर के राष्ट्रीय पुस्तकालय के निदेशक जोनफ वर्नवर्ड डोकन संसार की बीस से अधिक भाषाओं के ज्ञाता थे। नौ भाषाओं पर तो उनका प्रमाणिक तौर अधिकार था। जोनफ काफी व्यस्त व्यक्ति थे। उन्हें काफी पत्राचार करना पड़ता था। उनके पास नौ विभिन्‍न भाषाओं के अलग-अलग सचिव थे|जोनफ अपने सभी नौ सचिवों को एक साथ बिठाकर नौ विभिन्‍न भाषाओं में पत्र लिखवाते थे। उन्हें विशाल धार्मिक ग्रंथ ‘बाइबिल’ पूरा कंठस्थ था।

प्रख्यात लेखक टी0ई0 लारेंस की प्रसिद्ध प्रस्तक “द सिक्स पिलर्स आफ विज़डम’ की पूरी पाण्डुलिपी खो गई। लेकिन लारेंस ने वापस पूरी पुस्तक को  याददाशत से लिख लिया और समय पर प्रकाशक को पाण्डुलिपी दे दी।

बैंक के दो हजार ग्राहकों के खातों का विवरण याद था क्लर्क को

एक बार प० जर्मनी के हेगन शहर के एक बड़े बैंक में हुए भयंकर अग्निकांड में बैंक के सारे रेकार्ड और कागजी नोट जलकर भस्म हो गए। दूसरे दिन बैंक के आगे ग्राहकों की भारी भीड़ जमा हो गई और जमाकर्ता बैंक के अधिकारियों से हिसाब मांगने लगे। रेकार्ड के बिना जमाकर्ताओं के दावों का निपटारा असंभव कार्य था, किंतु ऐसी विषम स्थिति में बैंक में कार्य करने वाले एक क्लर्क ने सारी समस्या को आसानी से हल कर दिया।

उसने बैंक में दो हजार से भी अधिक ग्राहकों के खातों और जमा-राशि का हिसाब अपनी विलक्षण याददाश्त से बिल्कुल जुबानी बता दिया। सभी ग्राहक उसके द्वारा बताए गए हिसाब से पूर्णतया संतुष्ट थे। इस क्लर्क का नाम बर्थोलड नीव्हूर था। इस कार्य के पुरस्कार-स्वरूप उस मामूली क्लर्क को उस बैंक-समूह का डाइरेक्टर बना दिया गया।

पच्चीस बरसों तक अंधे पोस्टमैन ने डाक वितरण किया

इंग्लैण्ड के निवासी फिल्डिंक जन्मांध थे। उन्हें दस हजार व्यक्तियों के नाम-पते और उनका व्यवसाय जुबानी याद थे। इनमें से वह प्रत्येक व्यक्ति की आवाज सुनकर उसका नाम बता सकते थे। इसी प्रकार इंग्लैण्ड के ही एक पोस्टमैन मांटुगुनस ने पच्चीस वर्ष तक घर-घर जाकर डाक-वितरण का कार्य किया, जबकि वह जन्म से ही नेत्रहीन था। मात्र अपनी स्मरण-शक्ति के आधार पर बिना गलती किए वह पच्चीस साल तक पत्र आदि वितरण का कार्य करता रहा।

फ़्रांस के प्रधानमंत्री को विपक्षी नेताओं के भाषण जुबानी याद थे

फ़्रांस के प्रधानमंत्री लियान मैम्ब्रेज अनूठी याददाश्त के मालिक थे। विरोधी दल के नेताओं द्वारा संसद में दिए गए भाषणों का एक-एक शब्द उन्हें जुबानी याद था। संसद में पेश किए गए तमाम पिछले बजटों की एक-एक बात मय आंकड़ो के वह बता सकते थे। फ्रांस के ही मिलेट्री होटल का एक बैरा फैलिक्स मार्टिनी अपनी याददाश्त के कारण आज भी याद किया जाता है। सेना के बारे में फांस सरकार द्वारा  1856 में प्रकाशित विस्तृत रिपोर्ट का प्रत्येक अंश मार्टिनी को कंठस्थ था।

रिपोर्ट में प्रकाशित सेना के 26,208 अफसरों के संपूर्ण विवरण मार्टिनी तुरंत यथावत बता सकता था।

इंग्लैण्ड के मि0 लेसली वेल्च ग्रेट ब्रिटेन में पिछले डेढ़ सौ बरसों में हुई किसी भी खेल-कूद की घटना का पूरा ब्यौरा आंकड़ों सहित दे सकता है। जब लेसली 22 वर्ष का नवयुवक था, तब उसकी स्मरण-शक्ति बहुत कमजोर थी। उसने स्मरण-शक्ति को तीव्र करने का प्रयास किए और आज वह अपनी अद्भुत स्मरण-शक्ति के बूते पर ब्रिटेन ही नहीं, समूचे विश्व में चर्चित है। वह फुटबाल,तैराकी, घुड़दौड़, टेनिस आदि किसी भी खेल के किसी भी मैच का वर्णन कर सकता है ।

ल्यूमिथियन नामक एक अल्पायु बालक विश्व की किसी भी भाषा के गद्य व

पद्य को सिर्फ एक बार सुन कर उसी भाषा में पूर्ण विराम, अर्द्ध विराम तक की त्रुटि किए बिना दुहरा सकता था।

विलक्षण स्मरण-शक्ति का धनी होना व्यक्ति के बुद्धिमान होने से कोई सीधा संबंध नहीं रखता। यह तथ्य मस्तिष्क पर किए जा रहे व्यापक अनुसंघानों से सामने आया है। कुछ अत्यंत कुशाग्र-बुद्धि दार्शनिकों और वैज्ञानिकों को भुलक्कड़पन का रोग होता है. जबकि कई तीक्ष्ण स्मरण-शक्ति वाले व्यक्तियों की बुद्धि औसत से भी कम पाई गई है।

उदाहरणार्थ एक रूसी पत्रकार सोलोमन विनेयामियोव की स्मरण-शक्ति इतनी गजब की थी कि वह बरसों पहले सरसरी तौर पर पढ़े गए रेलवे टाईम-टेबिल को ज्यों का त्यों दोहरा सकते था। रूसी वैज्ञानिक एलेक्जेंडर ल्यूरिया ने सोलामन की जांच करने के बाद पाया कि वह स्मरण-शक्ति के क्षेत्र में तो विलक्षण है किंतु वैसे एक औसत दर्ज का पत्रकार हैं। जब सोलामन के आई0 क्यू०  का परीक्षण किया गया तो वह औसत दर्जे भी नीचे निकला।

स्मरण-शक्ति के चमत्कार अभी भी रहस्यावरण में ढंके हुए हैं| परत-दर-परत उघडने पर ही इस रहस्य की तह तक पहुचा जा सकेगा I