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आसमान की बिजली

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आसमान में चमकने वाली चपल बिजली सदियों से मनुष्य के लिए रहस्य और दिलचस्पी का विषय रही है। यह जितनी चमकीली है, उससे कहीं अधिक डरावनी भी। ‘गाज‘ या ‘तड़ित‘ के नामों से जानी जाने वाली यह आसमानी बिजली पलक झपकते ही किसी भी आदमी, पशु और बड़ी-बड़ी इमारतों को ध्वस्त करने की अपार क्षमता रखती है।
प्राचीन ग्रीस व रोम के धार्मिक ग्रंथों में बिजली को अत्यन्त महत्पूर्ण स्थान दिया गया है। इसे देवताओं के राजा ‘जीअस‘ के विशेषण से विभूषित किया गया है। भारतीय संस्कृति के अनुसार ‘बिजली‘ को भगवान श्री कृष्ण की बहन माना गया है, जो देवकी व वासुदेव की पुत्री थी तथा जिसे उसके मामा कंस ने अपनी मृत्यु का अवतार मानकर पत्थर पर दे मारा था। लेकिन ‘बिजली‘ कंस के हाथो से छिटक-कर आसमान में चली गई।
धार्मिक मान्यता से अलग हट कर वैज्ञानिक स्तर पर विचार किया जाए तो यह तथ्य सामने आता है कि वस्तुतः बिजली बादलों के घर्षण से उत्पन्न विद्युत आवेश है। बादलों की निचली सतह में ऋणात्मक तथा ऊपरी सतह में धनात्मक शक्ति होती है। इनके परस्पर घर्षण से तीव्र आवेश उत्पन्न होता है। वह लाखों वाॅल्ट के विद्युत के रूप में बादलों और भूमि के मध्य प्रवाहित होता है, किन्तु वायुमंडल में विद्यमान वायु के अवरोध उसकी शक्ति का हृास होता जाता है। धनात्मक और ऋणात्मक सिरे एक दूसरे को अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास करते हैं। इस प्रयास में धनावेशित तरंगे उत्पन्न होती हैं, जो बिजली के रूप में कुछ ही पलों में पहाड़ियों, ऊंची इमारतों, मीनारों और राह चलते लोगों पर कहर ढाकर उन्हें भस्म कर देती हैं। सामान्य तौर पर बिजली का तापमान सत्रह हजार से लेकर तीस हजार डिग्री सेंटीग्रेड होता है, जो सूर्य के तापक्रम से लगभग चार गुना अधिक है। आम तौर पर बरसात के समय आसमान में चमकने वाली टेढ़ी-मेढ़ी बिजली की चमकीली लकीरों को विद्युत लेखा कहा जाता है। सामान्य से सौ गुना अधिक शक्तिशाली बिजली को ‘गाज‘ कहा जाता है, इसमें दस अरब वाॅल्ट की विद्युत क्षमता होती है। ‘महागाज‘ इससे दस हजार गुना अधिक शक्तिशाली होती है। अकसर यह समुद्र में गिरती है, लेकिन कभी-कभी जब यह जमीन पर गिरती है, तो भारी विनाशलीला मचाती है। उपग्रहों द्वारा भेजे गये चित्रों और रिपोर्टो के अध्ययन से ज्ञात हुआ है कि विश्व में एक सैकंड में करीब 150 बार बिजली कड़कती है।
बिजली के कहर की कई घटनाएं सुनने में आती हैं। एक अनुमान के अनुसार, दुनिया भर में प्रतिवर्ष लगभग एक लाख व्यक्ति बिजली के शिकार होकर मृत्यु के मुख में समा जाते हैं।
सन् 1981 में अमरीका के उटा-क्षेत्र में स्थित राष्ट्रीय वन में गाज गिरने की एक घटना विशेष उल्लेखनीय है। यह गाज एक एकड़ क्षेत्र में गिरी, जिससे पूरा क्षेत्र तो जल कर भस्म ही हो गया, साथ ही वहां चर रहीं पांच सौ भेड़े एकदम जल कर राख हो गईं। इसी प्रकार सन् 1770 में स्टैड नामक एक स्वीडिश वैज्ञानिक ने बरसात के मौसम में धातु के पतले तार से पंतग उड़ा कर बिजली के संबंध में प्रयोग करना चाहा तो बिजली को स्टैड की यह दखलदांजी पसंद नहीं आई और उसने कड़क कर एक ही झटके स्टैड की जान ले ली।
पिछले दिनों लंदन में एक महिला बिजली के द्वारा बड़े अजीब ढंग से मरी । यह महिला बरसात के मौसम में टेलीफोन पर अपने किसी परिचित से बात कर रही थी कि टेलीफोन के तारों पर गिरी बिजली तारों के जरिए टेलीफोन तक आ पहुंची और महिला का घटना-स्थल पर ही प्राणांत हो गया।
कुछ समय पहले पश्चिमी घाट के इलाके के लगभग सौ फुट ऊंचे पेड़ पर बिजली गिरी। बिजली की गर्मी ने पेड़ की नमी को गैस में बदल दिया। इससे पेड़ के टुकड़े बम की भांति फट कर दूर-दूर जा गिरे इनमें से एक टुकड़े ने एक भैंस की जान ले ली।
ऐसा नहीं है कि आसमान से गिरने वाली बिजली इंसान को हमेशा नुकसान ही पहुंचाती है। कई बार इस बिजली ने अपने चमत्कार से अनेक असाध्य रोगों के रोगियों को एकदम स्वस्थ भी किया है। इंग्लैंड की काउंटी कैट के एक नगर ‘टन ब्रिजेवेल्स‘ में लकवे के एक रोगी के लिए बिजली वरदान सिद्ध हुई। वह पिछले बीस बरसों से लकवे का रोगी था। एक बरसाती रात में उस पर बिजली गिरी और सवेरे जब उसे होश आया तो वह और उसके पड़ोसी यह देख कर अचंभित रह गये कि उसे लकवे की शिकायत नहीं रही और वह मजे से चल फिर सकता है।
इंग्लैंड के ही एक सत्तर वर्षीय वृद्ध की नेत्र-ज्योती तीन वर्ष पूर्व जा चुकी थी और डाॅक्टरों के अनुसार अब उसकी नेत्र-ज्योति आने की कोई सम्भावना नहीं थी, लेकिन बरसात की एक रात जैसे-जैसे बिजली चमकती रही, उसकी नेत्र-ज्योति आश्चर्यजनक तरीके से लौटती रही। सुबह वह नेत्रहीन सब कुछ स्पष्ट रूप से देख रहा था। अब वह पुस्तकें और अखबार बड़ी आसानी से पढ़ सकता है।
बिजली गिरने से कभी-कभी बड़ी मजेदार घटनाएं भी घट जाती हैं। न्यूयार्क के एक 23 वर्षीय युवक पर बिजली गिरी। वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा। उसका समूचा शरीर सुन्न हो चुका था। कुछ समय बाद होश आने पर उसने पाया कि उसका स्टील फ्रेम वाला चश्मा कांच समेत पूरी तरह पिघल चुका था, लेकिन हैरत वाली बात यह थी कि उस युवक की आंखों या शरीर के किसी भी हिस्से को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
फ्रांस के एक डाक्टर को तूफान के समय बिजली गिरने पर लगा कि उसकी दाढ़ी में आग लग गई है। सचमुच दाढ़ी में आग लग गई थी, लेकिन ताज्जुब यह था कि दाढ़ी के अलावा उसका कोई अंग नहीं झुलसा था। डाक्टर का ख्याल था कि दाढ़ी फिर उग आएगी किंतु फिर कभी नहीं आई। इस तरह राह चलते उसे रोज-रोज दाढ़ी बनाने के झंझट से मुक्ति मिल गई।
स्वीडन में एक बार एक मकान पर बिजली गिरी, जो चिमनी से होती हुई कमरे में जा पहुंची और वहां रखे लकड़ी के सोफे को जला डाला और सोफे पर बैठे हुए सभी व्यक्ति बेहोश हो गए।
लिंकन शायर के एक किसान के खेत में एक के बाद एक अनेक बार बिजलियां गिरी। बरसात रूक जाने पर किसान खेत पर गया और खुदाई की तो उसे सारे आलू भूने हुए मिले। वह बेचारा सिर पीट कर रह गया।