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सेहत के लिए फायदेमंद है आलू

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आलू उत्पादन के मामले मे भारत का विश्व में पांचवा स्थान है। देश में प्रतिवर्ष 1 करोड़ 51 लाख टन आलू का उत्पादन हो रहा है। देश में एक हैक्टेयर में 15 टन आलू का उत्पादन होता है। केन्द्रीय आलू अनुसंधान परिषद ने आलू का रोग मुक्त बीज तैयार किया है। बीज संस्थान के पांच फार्म कुफरी, (हिमाचल प्रदेश) गोदावरी, (उतर प्रदेश) ग्वालियर (मध्य प्रदेश), पटना (बिहार) और जालंधर (पंजाब) में है। ये रोगमुक्त बीज इन्हीं संस्थानों में तैयार किये गये है। संस्थान ने आलू की 21 बेहतर किस्में जारी की हैं। इन किस्मों की देश के विभिन्न भागों में खेती की जा सकती है। संस्थान ने आलू की फसल की बीमारियों और कीटों की पहचान के लिए सर्वेक्षण भी कराया है और इनकी रोकथाम के उपाय भी किये हैं।
आलू सोलहवीं शताब्दी तक हमारे देश के लिए अनजान था। अमेरिका के पेरू और बोलिविया की अपनी जन्म-भूमि से इस आलू ने यात्रा की । 1570 में स्पेन पहुंचा और 1656-57 के मध्य आयरलैंड जा पहुंचा। सत्रहवीं शताब्दी की शुरूआत में पुर्तगाल से भारत में आने वाले कुछ व्यापारी अपने देश से आलू के कन्द साथ लेकर आये, जिन्हें भारत में किचन गार्डन में बो दिया गय। पौधे बड़े होने पर खोद गये तथा खाये गये तो लोगों को आलू का स्वाद बहुत पसंद आया। इन्हें खेतों में बोया गया, फिर इन्हें बाजार में बेचा गया तो यह तुरन्त बिक गया।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने आलू को एक संतुलित सब्जी के रूप में अपनाने के लिए सुझाव दिया है। आलू किसी भी दूसरी संतुलित सब्जी की तरह ही संतुलित है। इसमें 2.7 प्रतिशत उच्च स्तरीय प्रोटीन, 17.4 प्रतिशत, कार्बोहाइड्रेट्स होता है। इसमें आंखों और त्वचा के लिए उच्चतम विटामिन काफी मात्रा में होता हैं। इसके अतिरिक्त इसमें पोटेशियम लोहा, मैग्नेशयम जैसे महत्वपूर्ण खनिज भी पाये जाते हैं। इसमें नियमित और एस्कार्बिक अम्ल के अतिरिक्त बड़ी मात्रा में लायसीन, और अमीनो अम्ल भी पाये जाते हैं।
आलू को अत्यधिक पौष्टिक और अपने आप में एक सम्पूर्ण खाद्य पदार्थ के अतिरिक्त ऊर्जा के एक बड़े स्त्रोत के रूप में पाया जाता है। अमेरिका में प्रतिदिन की खुराक का 65 प्रतिशत आलू ही पूरा करता है। आलू ही ‘विटामिन सी‘ का भी प्रमुख स्त्रोत है। वानस्पतिक रूप से यह सोलेनेसी परिवार का पौधा है। यह पौधा जमीन से ऊपर दो से तीन फुट लंबा होता है। इनकी जड़ों के अन्दर आलू गांठ के रूप में विकसित होता है। आलू को सभी प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है। नदियों के किनारे की मिट्टी इसके लिए अधिक उपयुक्त है।
दो सौ वर्ष पहले तक यूरोप में आलू खाना पाप समझा जाता था क्योंकि वहां यह धारणा थी कि बाईबिल में आलू का वर्णन न होने से इसका प्रयोग वर्जित है। आज विश्व का 90 प्रतिशत आलू यूरोप में पैदा होता है, शेष पांच प्रतिशत आलू अमेरिका तथा पांच प्रतिशत विश्व के दूसरे हिस्सों में पैदा होता है। भारत में लगभग 8 लाख हैक्टेयर भूमि पर इसकी खेती होती है। अमेरिका में इसकी दर 100 से 125 किलोग्राम प्रति व्यक्ति है, जबकि भारत में यह मात्र 13 किलोग्राम प्रति व्यक्ति है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने देशवासियों से अपील की है कि आलू को अधिकाधिक अपने आहार में शामिल करने की कोशिश करें। परिषद के अनुसार आलू एक ऐसी संतुलित सब्जी है, जो सस्ती है, तो साथ ही इसमें मानव शरीर के लिए उपयोगी सारे पौष्टिक तत्व मौजूद हैं।
आलू में प्रोटीन तथा कार्बोहाइड्रेट्स अधिक पाये जाते हैं, जिसके कारण पश्चिमी और यूरोपीय देशों में दैनिक आहार के रूप में इसे अपनाया गया है। भारत में यह वर्ष भर उपलब्ध रहता है तथा अनाज के एक संतोषप्रद विकल्प में रूप में इसका इस्तेमाल होता है। आलू के गुणों का वर्णन करते हुए कहा गया है कि यही वह खाद्य पदार्थ है, जिसके कारण आयरलैंड की ऐतिहासिक क्रांति सफल हो सकी थी और दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भूखमरी रूकी थी। इंग्लैंड तथा पश्चिमी जर्मनी सहित अनेक यूरोपीय देशों को भीषण खाद्य संकट के दौरान इसी आलू का सहारा रहा है। आलू अपने आप में संतुलित आहार है और इससे मानवीय ऊर्जा की बड़ी मात्रा मिलती है। तीसरे विश्व की तेजी से बढ़ती आबादी भी अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए आलू पर अधिक से अधिक निर्भर रहने लगी है।
आलू को संस्कृत में आलुक, मराठी में बटाटा, गुजराती में बटाटा, तमिल में उर्लगडू, अंग्रेजी में पोटेटो, लेटिन में सोलेनम टूयूबरोसम कहते हैं। अमेरिका के वैज्ञानिकों ने डाइबिटीज के रोगियों को इससे दूर रहने को कहा है क्योंकि आलू के सेवन से रक्त में ग्लूकोज की मात्रा असामान्य रूप से बढ़ जाती है। भारत में आलू की खपत कम होने के पीछे दो मुख्य कारण हैं- एक तो इसका उत्पादन अपर्याप्त मात्रा में होता है, दूसरे लोगो के मन में यह धारणा बैठी हुई है कि आलू खाने से मोटापा बढ़ता है। लेकिन परिषद के वैज्ञानिक इसका खंडन करते हैं कि आलू की कैलोरी वैल्यू कम है क्योंकि इसमें स्टार्च और शुगर की मात्रा कम होती है। इसका अधिकांश भाग 77.4 से 80 प्रतिशत तक पानी होता है, जो अनाज व फलों से कहीं अधिक है। इसमें प्रोटीन अच्छे गुणवतव वाला होता है, जो मोटापा बढ़ने नहीं देता है। इसमें फैट केवल 0.1 प्रतिशत तथा फाईबर 0.7 प्रतिशत है, जो काफी कम होता है। इसलिए मोटापे से बचने के लिए आलू खाईये।