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A village of blind people | एक गॉव का अंधों का

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A village of blind people

टिल्टेपैक – अंधों का गांव (village of blind people)

मैक्सिको के प्रशांत सागरीय इलाके में टिल्टेपैक नाम का एक गाँव है , जहाँ अंधे ही अंधे रहते है । इस गांव में लगभग तीन सौ रेड इण्डियन निवास करते हैं । इस वैज्ञानिक समृद्धि के युग में भी ये बेचारे पत्थर के बिछौने पर सो कर रात गुजारते है । इन लोगो का खानपान भी सेम और मिर्ची के अतिरिक्त कुछ नही है । इनके खेती बाड़ी के औजार भी पुराने ढंग के पत्थर या लकड़ी के ही बने है । जापोटैक जाति के ये लोग बेहद मेहनती हैं, मगर बेचारे सभी अंधे है ।

बच्चे सामान्य , बाद में अंधे

 यहाँ जो बच्चे पैदा होते है , वे जन्म के कुछ सप्ताह तक तो बिल्कुल सामान्य रहते है और भली भांति देख पाते हैं। लेकिन कुछ सप्ताह बाद उनकी दृष्टि हमेशा के लिए खत्म हो जाती है । यहाँ के बिल्ली , कुत्ते और अन्य पशु भी पूर्णतः अंधे हैं । कुदरत के इतने क्रूर मजाक के बावजूद ये लोग बड़ी मस्ती में अपनी जिन्दगी जी रहे हैं । इन्होने अपने अनुकूल अलग ही जीवन मार्ग निधरित कर लिया है ।

टिल्टेपैक में केवल एक सड़क बनी हुई है और उसी के किनारे बेतरतीब -सी फैली हुई करीबन 60 झोपड़ियों में न तो कोई दरवाजा है और न ही खिड़कियां । रात को आप को यहां पर कोई बत्ती या दीपक जलता हुआ नहीं मिलेगा । रोशनी की खैर इन बेचारों को जरूरत भी कहाँ है ?

सड़क पर खेलते अंधे बच्चे Blind children

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A village of blind people

बड़े सवेरे जंगली पशु – पक्षियों की आवाज सुन कर ये लोग जग जाते है और नित्य कर्म से निवृत होकर अपने -अपने कामों में व्यस्त हो जाते है । स्त्रियां करघा चलाती हैं तथा घर का कामकाज करती हैं और पुरुष अपने खेतों की ओर चल देते हैं । इन अंधे प्राणियों को देख कर आप की आंखे यूँ ही भर आएंगी , लेकिन सबसे मार्मिक और करूणाजनक दृश्य आप के सामने उस वक्त आएगा ,जब आप सड़क पर खेलने वाले उन मासूम बच्चों को देखेंगे , जो टटोल – टटोल और छू-छू कर अपना एक एक कदम आगे सारे बढ़ाते हैं!

शराब भी , घूंसेबाजी भी Blind

पूरे दिन जी- तोड़ मेहनत के बाद सब लोग शाम के समय एक जगह एकत्र होते हैैं और भोजन के बाद छककर शराब पीते है । अक्सर इन नेत्रहीनों के मध्य घूंसेबाजी भी होती है, जिसमें यह अपनी सम्पूर्ण क्रूरता का परिचय देते हैं ।

नेत्ररोग विशेषज्ञों ने किया शोध

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1927 ई ० में मैक्सिकों के सुप्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ . रामन पाडो को इस गाँव के बारें में जानकारी मिली और उन्होने इस सम्बन्ध में तहकीकात की । अपनी जांच के दौरान डा . रामन को कुछ अन्य दूसरी जातियों के बारे में भी जानकारी मिली , जो जापोटेक लोगो की तरह ही अंधेपन के शिकार हैं ।

 वर्तमान में तो इन अंधों की खोज -खबर लेने वाले पहले व्यक्ति डा . रामन ही साबित हुए । लेकिन आज से काफी समय पूर्व सोलहवीं सदी में स्पेनियों ने मैक्सिको के इस क्षेत्र में विचित्र नेत्र रोग के प्रसार का अनुमान लगाया था । सभ्यता के प्रचार – प्रसार के साथ – साथ यहाँ के बागान मजदूरों में यह व्याधि इस तेजी से फैली कि स्पेन से कई नेत्र विशेषज्ञों को तत्काल मैक्सिको भेजा गया । किन्तु सभी संभव प्रयत्नों के बावजूद इस रोग का कारण पता नही कर सके। 

पेड़ पर निगाह पड़ने से अंधापन ? Blind

जापोटेक लोगों के अनुसार , ‘लोबर्जुयजा ‘ नामक एक पेड़ की ओर निगाह पड़ने से ही लोगों को अंधत्व की शिकायत हो जाती है । इस संबंध में उनके यहाँ एक बहुत पुरानी मान्यता चली आ रही है कि उस पेड़ पर जिसकी भी नजर पड़ेगी , वह अंधा हो जाएगा । लोकोक्ति के आधार पर यह सम्भावना व्यक्त की गई कि उस पेड़ पर निवास करने वाले चमगादड़ो के साथ ही इस रोग के कीटाणु आसपास फैलते हों , लेकिन शोध से यह साबित नहीं हुआ ।

काली माखी अंधेपन Blind की वजह

विगत कुछ समय पूर्व अनुसंधानकर्ताओं ने यह निष्कर्ष निकाला है कि इस भयानक नेत्र रोग का कीटाणु है  ‘अंकर्सयासिस ‘ जिसे एक प्रकार की काली मक्खियों के द्वारा फैलाया जाता है । ये काली मक्खियों के द्वारा फैलाया जाता है । ये काली मक्खियां सब जगह इन कीटाणुओं को फैलाती हैं, लेकिन हरेक स्थान पर इनका प्रभाव बराबर नही पड़ता ।

अंकर्सियासित कीटाणुओं का प्रसार काली मक्खियों बिल्कुल उसी तरह करती हैं , जिस तरह मलेरिया के कीटाणुओं का मच्छर करते हैं । ये काली मक्खियों जब किसी व्यक्ति को काटती है , तो उसके रक्त में ये कीटाणु प्रवेश कर जाते हैं और धीरे – धीरे शरीर के अन्दर ही अन्दर फैलने लगते हैं । नतीजतन मनुष्य के शरीर में सूजन- सी आने लगती है और अंतत: ये कीटाणु चक्षु -प्रदेश तक पहुंच जाते हैं । वहाँ पहुँच वे नसों को अस्त – व्यस्त कर डालते हैं और इसका परिणाम होता है – अंधत्व।

वैज्ञानिक अनुसंधान जारी

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इस भयावह व्यधि से मुक्ति के लिए अमेरिकी वैज्ञानिक अनुसंधान कर रहे हैं । वैज्ञानिक कोई ऐसा रासायनिक द्रव्य खोजने में व्यस्त हैं , जिसे व्यक्ति के शरीर में प्रवाहित कर देने से शरीर में कुछ ऐसे तत्व उत्पन्न हो जाएं , जो इन कीटाणुओं का प्रतिरोध करने में सक्षम हो|                                                                                               

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