अलविदा … दिलीप साहब

💐💐💐💐💐💐💐💐

मैंने दिलीप कुमार की जो पहली फिल्म देखी वह थी-  ‘राम और श्याम ‘ संभवत सन 1969-70 के आसपास 14-15 वर्ष की उम्र में मैंने यह फिल्म देखी थी। मेरे किशोर मन पर इस फिल्म का जबरदस्त असर हुआ। राम के रूप में सीधे साधे डरे सहमे से शख्स ,जो खलनायक प्राण के हंटर से पीटते नजर आते थे,दूसरी तरफ फिल्म के अगले हिस्से में जब दिलीपकुमार श्याम के रूप में नजर आते हैं तो एकदम बिंदास ..मस्तमौला.

हिंदुस्तानी सिनेमा के एक युग की समाप्ति

. और जब वह उसी हंटर से प्राण की पिटाई करते तो जिस आनंद और रोमांच की अनुभूति किशोरवय  में होती  थी ,उसकी हल्की सी सिहरन व गुदगुदी आज भी महसूस होती है। ‘ राम और श्याम’ ने मुझे दिलीपकुमार का जबरदस्त फैन बना दिया। उसके बाद मैंने दिलीप साहब की नया दौर, पैगाम से लेकर गोपी, विधाता तक लगभग सभी फिल्में देखें। ट्रेजेजी किंग के नाम से मशहूर युसूफखान उर्फ दिलीप कुमार की मृत्यु हिंदुस्तानी सिनेमा के एक युग की समाप्ति है ।

आजादी के बाद राजकपूर, दिलीपकुमार व देवानंद की त्रिमूर्ति का राज

आजादी के बाद के सालों में राजकपूर, दिलीपकुमार व देवानंद की त्रिमूर्ति सुनहरे पर्दे पर राज करती रही।  राजकपूर नेहरू युगीन सपनों का रुपहले पर्दे पर समाजवादी अनुवाद करते रहे तो देवानंद एक रोमांटिक नौजवान की इमेज के इर्द-गिर्द घूमते रहे। दिलीपकुमार  दुखांत भूमिकाओं के चलते ट्रेजडी किंग के नाम से मशहूर हुए हालांकि बाद के सालों में उन्होंने साबित किया कि उनकी अभिनय प्रतिभा की रेंज बेहद व्यापक है । कॉमेडी से लेकर रोमांटिक भूमिकाओं तक उनकी लाजवाब  फनकारी देखते से बनती है ।

सायरा बानो- दिलीप कुमार दाम्पत्य जीवन अत्यंत सफल व आदर्श

अपनी उम्र से आधी उम्र की सायरा बानो से दिलीप साहब की शादी इस जमाने मे बेहद चर्चित रही थी लेकिन यह बात आज पूरी फिल्मी दुनिया में मानी जाती है कि उन दोनों का दाम्पत्य जीवन अत्यंत सफल व आदर्श रहा । सायरा जी ने आख़री क्षण तक साहब की बेहतरीन खिदमत की । दिलीप साहब अपने जीवनकाल में ही किवदन्ती बन चुके थे। उनका परिवार पेशावर ( पाकिस्तान )  यहां आया था । पेशावर में राजकपूर उनके पड़ोसी थे ।हाल ही में पाकिस्तान सरकार ने दिलीप साहब व राजकपूर साहब के घरों को राष्ट्रीय स्मारक के रूप में मान्यता दी है ।

पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान  मिला

यहां यह जिक्र करना मुनासिब होगा कि पाकिस्तान सरकार ने कई सालों  पहले पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान  ‘निशान-ए-पाकिस्तान ‘ दिया था । दिलीप कुमार एक शानदार अभिनेता थे ,साथ ही वे इस मुल्क के जिम्मेदार नागरिक और बेहतरीन इंसान भी थे ।

फिल्म इंसानियत में देवानंद ने उनके साथ काम कियाl फिल्म आजाद में मीना कुमारी के साथ उनका मस्त मौला किरदार थाl

दिलीप साहब के अभिनय और हेयर स्टाइल के उस समय के युवा दीवाने थे

दिलीप साहब के अभिनय और उनकी हेयर स्टाइल पर उस समय के युवा दीवाने रहते थेl बाद के दिनों में अभिनेता राजेंद्र कुमार ने इस स्टाइल तथा अभिनय को आगे बढ़ाया उनके अभिनय की खासियत थी कि पर्दे पर जिस किरदार को जीते थे, उसमें पूरी तरह डूब जाते थेl मधुमति पैगाम नया दौर लीडर गोपी गंगा जमुना राम और श्याम और मुग़ल-ए-आज़म जैसी अनेकानेक सुपर हिट फिल्मों ने उनके अभिनय और उनकी लोकप्रियता को निरंतर नई बुलंदियां दीl

उर्दू अदब के गहरे जानकार भी

वे संपूर्ण भारत तथा पड़ोसी देशों की जनता और तत्कालीन हुकम रानों के चहेते अभिनेता थेl अच्छे अभिनेता के साथ साथ आप एक बहुत अच्छे एंकर भी थेl आपने देश विदेश में कई विश्व प्रसिद्ध समारोहों की शानदार और उच्च कोटि की एंकरिंग कीl वे एक शानदार फनकार होने के साथ-साथ उर्दू अदब के गहरे जानकार भी थेl कलाकारों और साहित्यकारों का बड़ा सम्मान करते थेl

अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त एक श्रेष्ठ नागरिक और एक बहुत अच्छे इंसान वक्त के शहजादे  दिलीप कुमार साहब ,जिन्होंने सात दशकों तक दुनिया का मनोरंजन किया, लोगों के दिलो दिमाग पर राज करते रहेl

ऐसी अजीम शख्सियत अब हमारे बीच नहीं हैlअपने कड़वे मीठे तजुर्बे अपना नायाब अभिनय अपने जख्म और अपनी बुलंदियां यादों के रूप में हमारे बीच छोड़कर उड़न खटोले पर सवार होकर वे हमेशा हमेशा के लिए हमसे दूर बहुत दूर जा चुके हैंl

भारी मन और नम आंखों के साथ हमारा आखरी सलाम कबूल करें दिलीप साहब ………..

कैसे-कैसे लोग इस दुनिया से रुखसत हो गए

कुछ फरिश्ते चल रहे थे जैसे इंसानों के साथl

उनकी कमी हमेशा महसूस की जाती रहेगी ।

दिलीप जी पर कवि कुमार विश्वास को सुनिए

जब अंग्रेजों की वजह से जेल गए दिलीप कुमार