गुलजार की बातें

एक बार तो यूँ होगा, थोड़ा सा सुकून होगा

ना दिल में कसक होगी, ना सर में जूनून होगा…

– गुलजार

लकीरें हैं तो रहने दो

किसी ने रूठ कर गुस्से में शायद खींच दी थी

– गुलजार