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गर्मियों में तरावट देता है तरबूज | Information about watermelon in hindi

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तरबूज

तरबूज गर्मियों के तपते मौसम में आने वाले तरावटी तरबूज की ठण्डक और तरावट तन-मन दोनों को सचमुच ताजगी पहुंचाती है । तरबूज दरअसल पानी का प्रचुर भण्डार है । वनस्पति शास्त्रियों के अनुसार तरबूज का मूल जन्म – स्थान अफीका के गर्म रेगिस्तानी क्षेत्र हैं । वैसे अब तरबूज का उत्पादन कमोबेश पूरी दुनिया में होता है ।

 भारत में तरबूज के अस्तित्व के प्रमाण सिंधु घाटी सभ्यता से भी पूर्व के मिलते हैं । संस्कृत साहित्य में इसे ‘ कालिंदा अथवा ‘ कलिंग ‘ के नाम से जाना जाता है । तरबूज को गुजराती में तड़बूज ,तमिल में कोमाट्टी और दरबुसिनी , मराठी में कलिंगड़, कश्मीर में हेंड-वेंद और  मलयालम में थन्नीमथन कहा जाता है। अरबी में तरबूज को बतीख अखफर कहा जाता है। बनस्पति शास्त्र के अनुसार , तरबूज का संबंध ‘ कुकर बिटेसी ‘ परिवार से है । इस कुल में तरबूज के अतिरिक्त अधिकांशतः वह सब्जियां हैं , जो लताओं पर लगती हैं ।

 आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में तरबूज को एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है । आयुर्वेद के अनुसार तरबूज ग्राही , नेत्र – ज्योतिवर्द्धक , शीतलक , वात व कफनाशक तथा प्यास को शांत करने वाला माना गया है । आयुर्वेद में तरबूज के रस को मन व मस्तिक को शीतलता और स्फूर्ति प्रदान करने वाला बताया गया है । तरबूज ही नहीं , उसके बीज भी अत्यंत पौष्टिक होते हैं ।

 तरबूज के सौ ग्राम गूदे से जहां हमें केवल 36 कैलोरी ऊर्जा मिलती है , वहीं इसके बीजों की 100 ग्राम गिरी से हमें 514 ग्राम कैलोरी ऊर्जा मिलती है । इसके अतिरिक्त, तरबूज के बीज की गिरी में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन , वसा और खनिज लवण पाए जाते हैं । ठंडाई बनाने में भी बीजों का उपयोग किया जाता है । अतएव इस पौष्टिक मेवे को व्यर्थ फेंकने की बजाय उसका सदुपयोग किया जाना चाहिए ।

रासायनिक संरचना :

( प्रति सौ ग्राम में ) कैल्शियम : 10 मिलीग्राम , आयरन : 12 मिलीग्राम , फास्फोरस 10 मिलीग्राम , पोटेशियम : 319 मिलीग्राम , सोडियम : 13.5 मिलीग्राम , मैगनीशियम : 20 मिलीग्राम , तांबा 0.4 मिलीग्राम , तथा विटामिन सी व प्रोटीन : 1 ग्राम , काबोहाइड्रेट 4 ग्राम , विटामिन बी काम्प्लेक्स 4 ग्राम । इसके अतिरिक्त शेष अंश जल का होता है ।

 विभिन्न रोगों के उपचार में तरबूज का उपयोगः

मूत्र रोग में उपयोगी तरबूज (watermelon) :

 • पेशाब में जलन होने पर रात – भर ओस में रखे तरबूज का रस निकाल कर प्रातःकाल मिश्री मिलाकर पीना चाहिए।

 •  प्रतिदिन तरबूज का सेवन करने से मूत्रावरोध दूर होता है।

 •   तरबूज तथा इसके बीजों के सेवन से पथरी रोग में लाभ होता है ।

 • तरबूज के बीज की गिरी मूत्र रोगों की रामबाण दवा है , साथ ही यह बवासीर में भी लाभदायक है ।

 • तरबूज के 50 ग्राम रस रस में मिश्री मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करने से मूत्राशय से संबंधित अनेक रोग विकार नष्ट हो जाते हैं

मस्तिष्क सम्बन्धी रोग में उपयोगी तरबूज (watermelon) :

• मस्तिष्क की गर्मी को दूर करने के लिए तरबूज के बीजों की गिरी 10 ग्राम ठंडे पानी में भिगो दें । सुबह उसमें बीस ग्राम मिश्री तथा पच्चीस ग्राम गाय के दूध का मक्खन तथा काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर एक माह तक सेवन करें ।

• तरबूज के बीजों की गिरी को पानी के साथ बारीक घिसकर गाढ़ा पेस्ट बना लें । इस पेस्ट को सिर पर लेप करने से तेज सिर दर्द में शीघ्र लाभ मिलता है ।

• मस्तिष्क उन्माद को दूर करने के लिए एक कप तरबूज का ज्यूस , एक कप दूध और पर्याप्त मात्रा में मिश्री मिलाकर चांदनी रात में छलनी से ढक कर रखें तथा सुबह भूखे पेट रोगी को पिलाएं ।

• तरबूज और खरबूजे के पांच 5 ग्राम बीजों को रात में जल में डालकर रखें । सब उसी के साथ पीसकर उसमें मक्खन और मिश्री मिलाकर सेवन करने से मस्तिष्क की गर्मी की विकृति नष्ट होती है।

विभिन्न रोगो में उपयोगी तरबूज (watermelon):

• तरबूज के बीज की गिरी को पीसकर चूर्ण बनाकर उसे उबलते हुए पानी में डालकर एक घंटे पश्चात् पानी को छानकर पीने से उच्च रक्तचाप ठीक हो जाता है ।

• सूखी खांसी में तरबूज खाने से शीघ्र लाभ होता है ।

 • तरबूज के छिलकों को सूखाकर भस्म बना लें । इस भस्म को पानी रिसने वाले एक्जिमा में प्रभावित हिस्से पर बुरक दें । यदि सूखा एक्जिमा है तो इस भस्म को सरसों के तेल में मिलाकर गर्म कर लें । इस मरहम को एक्जिमा ग्रस्त स्थान पर लगाएं।

 • तरबूजे के गूदे में नमक , काली मिर्च और शक्कर मिलाकर इसका ठंडा रस पीने से शरीर में व्याप्त अम्लीयता दूर होती है ।

• तरबूज के बीजों में शहद मिलाकर खाने से कफ में खून आना रूक जाता है ।

•  बवासीर के रोगियों को तरबूज के रस में आंवले का चूर्ण मिलाकर लेना चाहिए ।

• हाथ – पांव तथा तलुओं की जलन में तरबूज के छिलकों तथा उसके सफेद भाग में चन्दन व कपूर मिलाकर पेस्ट बनाकर लेप करने से जलन दूर होती है ।

 • भोजन के बाद जी मिचलाने पर एक गिलास तरबूज के रस में मिश्री मिलाकर पीएं ।

 • तरबूज के सेवन से वीर्य – वृद्धि होती है ।

सावधानियां / परहेज तरबूज (watermelon):

• दमा और अस्थमा के रोगियों को तरबूज के रस का सेवन नहीं करना चाहिए ।

 • तरबूज के सेवन से दो घंटे पूर्व तथा तीन घंटे बाद तक चावल का सेवन नहीं किया जाना चाहिए ।

 • भूखे पेट तरबूज खाने से पेट – दर्द या जी मिचलाने की शिकायत हो सकती है ।

 •  अधिक देर से कटे हुए , धूप में पड़े हुए , सड़े – गले तरबूज का सेवन न करें ।

• तरबूज खरीदते समय वजनदार और ठोस तरबूज देखकर लें । हल्का लगने वाला तरबूज अंदर से खोखला या सड़ा हुआ निकल सकता है ।

• तरबूज को उपयोग में लेने से पूर्व उसे घंटे भर पानी में डालकर रखें । गैस की शिकायत वाले व्यक्ति तरबूज का सीमित मात्रा में सेवन करें ।

• तरबूज खाने के बाद जल नहीं पीना चाहिए क्योंकि इससे जुकाम होने की आशंका रहती है।