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गर्मियों में उपयोगी फल : खरबूजा |Summer fruit useful: muskmelon

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गर्मियों में उपलब्ध स्वादिष्ट फलों में खरबूजा एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है । कच्चे खरबूजे का रंग हरा व स्वाद खट्टा होता है , जबकि अच्छी तरह पका हुआ खरबूजा हल्के पीले – भूरे रंग का और स्वाद में रुचिकारक होता है । यह पौष्टिक तथा तरावट देने वाला फल है । खरबूजे की तासीर गर्म मानी गई है ।

आयुर्वेद के अनुसार, खरबूजा स्वादिष्ट , मूत्रजनक , बलकारक , कोठ शुद्धिकारक , शीतल , वीर्यवर्द्धक तथा पित्त व वायुनाशक माना गया है । खरबूजे के सेवन से मुत्रावरोध नष्ट होता है ।खरबूजे में पाए जाने वाले अम्ल मधुर व क्षार – रसयुक्त होते है , जो रक्तपित्त और मूत्र कृच्छ दूर करने वाले होते हैं । नदी के रेतीले किनारों पर पैदा होने के कारण खरबूजे को ‘ बालुकी ‘ भी कहा जाता है।।इसका लेटिन में नाम ‘कुकुमिस मेलो’ है ।

संस्कृत में इसे ‘ षड्भुजा ‘ कहा जाता है । यह फल लौह तत्व , विटामिन सी , प्राकृतिक शर्करा तथा खनिज लवणों से भरपूर रहता है । प्रति सौ ग्राम खरबूजे में 0.6 ग्राम प्रोटीन , तथा 0.10 ग्राम वसा होती है । इसके अलावा, पर्याप्त मात्रा में लौह तत्व , विटामिन सी तथा खनिज लवण पाए जाते हैं ।खरबूजे में पर्याप्त मात्रा में खनिज लवण होने से इस स्कर्वी रोग से सुरक्षा होती है।

खरबूजा अनेक औषधीय गुणों से सम्पन्न होता है । जलोदर , पीलिया , पथरी , तथा गुर्दे की अन्य बीमारियों में इसका उपयोग लाभदायक माना गया है । खरबूजे के बीज भी उपयोगी होते हैं । यह शीत माने जाते हैं । खरबूजे के बीजों का तेल पौष्टिक होता है तथा सौंदर्य प्रसाधनों में प्रयुक्त होता है ।

खरबूजा मूलतः कैलयक टार्टरी नामक स्थान का फल है । भारत में इसका आगमन ईरान के रास्ते हुआ । काबुल , लद्दाख , तिब्बत , बलुचिस्तान आदि स्थानों पर खरबूजों की पैदावार बहुतायत से होती है । भारत में भी प्रायः सभी नदियों के रेतीले तट पर इसकी खेती की जाती है ।

विभिन्न रोगों के उपचार में खरबूजे का उपयोग :

कब्ज:

• पुरानी कब्ज के रोगी खरबूजे को काली मिर्च और सैंधा नमक लगाकर निरन्तर खाएं ।
• कब्ज और आमाशय के रोगों के लिए खरबूजे के गूदे को मिक्सी में पीसकर कुछ मात्रा में नीबू का रस और चीनी डालकर सेवन करें । इससे राहत मिलेगी ।
• कब्ज की शिकायत वाले व्यक्ति अच्छी तरह पके हुए खरबूजे का ही इस्तेमाल करें ।

तापापात / लू:

• लू लगने पर खरबूजे के बीजों को पीसकर सिर और शरीर पर लेप करना चाहिए ।
• .खरबूजे के बीजों से बनी ठंडाई भी लू में राहत पहुंचाती है ।

अन्य :

• ग्रीष्मकाल में नियमित रूप से खरबूजे का सेवन करने से शारीरिक दुर्बलता समाप्त होती है ।• एक्जिमा जैसे त्वचा रोग में खरबूजे के सेवन से काफी लाभ होता है ।
• मूत्रकृच्छ तथा मूत्राघात में खरबूजे के बीजों का सेवन करना उपयोगी होता है ।
• खरबूजे को चबाने से दांत चमकीले बनते हैं तथा उन पर जमा टार्टर साफ हो जाता है ।
• गर्मी में आमतौर पर बढ़ जाने वाली अम्लीयता यानी एसीडिटी में खरबूजे के सेवन से शीघ्र राहत मिलती है ।

• खरबूजे के बीजों को नारियल के पानी के साथ पीसकर लेप करने से त्वचा रोग , क्षय , एक्जिीमा आदि में लाभ होता है ।
• खरबूजे के छिलकों को सूखाकर उसे पानी में उबालें । फिर छानकर उसमें थोड़ी शक्कर मिलाकर सुबह- शाम पीने से गुर्दों का दर्द दूर होता है ।
• सूजाक के रोगी को खरबूजे के बीज का शरबत बनाकर उसमें कुछ बूंदें शुद्ध चन्दन के तेल की मिलाकर देने से कुछ समय में रोग समाप्त हो जाता है ।

• स्तनपान करने वाली स्त्रियों को खरबूजा अवश्य खाना चाहिए । यह दूध में वद्धि करता है ।
• पथरी के रोगियों को खरबूजे का नियमित सेवन करना चाहिए ।
• खरबूजे की जड़ को जल के साथ पीसकर पानी में मिलाकर छानकर पीने से कुछ सप्ताह में मूत्राशय की पथरी नष्ट होकर निकल जाती है।

परहेज / सावधानियां:

• खरबूजे का सेवन भोजन से पूर्व तथा भोजन के तत्काल बाद नहीं करना चाहिए ।
• खरबूजे को उपयोग में लाने से पूर्व लगभग एक घंटे तक इसे ठंडे पानी में भिगोकर रखना चाहिए ।
• खरबूजे का अत्यधिक सेवन निषिद्ध है क्योंकि इससे आंतें कमजोर होने की आशंका रहती है।
• ताजा खरबूजे का ही सेवन करना चाहिए । बासी या अधिक समय पूर्व कटा हुआ खरबूजा खाने से हैजे की आशंका रहती है ।

• भूखे पेट कभी खरबूजा नहीं खाना चाहिए ।इससे उधर में पित्त विकारों की आशंका रहती है।
• खरबूजे के साथ चाय , दूध , दही , लहसुन व मूली सेवन नहीं करना चाहिए ।
• अधिक खांसी और जुकाम से परेशान रहने वालों को खरबूजे का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए। कफ विकार के रोगी भी खरबूजे का सेवन सीमित मात्रा में ही करें।
• खरबूजा खाने के तत्काल बाद कभी भी पानी नहीं पीएं। इससे वमन और हैजे की शिकायत हो सकती है।

• कमजोर पाचन शक्ति वाले लोगों को खरबूजे के सेवन के बाद मिश्री का सेवन करना चाहिए।
• अस्थमा के रोगी को खरबूजे से परहेज करना ही बेहतर है।
• खरबूजे का सेवन करते समय इसके बीजों को अलग कर देना चाहिए ।खरबूजे के बीज चिकने व नुकीले होने के कारण आंत्रच्पूछ में जाकर अपेंडिसाइटिस की आशंका पैदा कर सकते हैं।

(विशेष: विभिन्न रोगों का उपचार खरबूजे के द्वारा करते समय किसी योग्य चिकित्सक की देखरेख/परामर्श से करें!)